दोपहर में ही क्यों हुआ राम लला का सूर्य तिलक, क्या है ये परंपरा, कैसे निभाते हैं - 5 बड़ी बातें

Ram Lalla Surya Tilak 2026: राम नवमी के पावन पर्व पर राम लला का सूर्य तिलक संपन्न हो चुका है। इस खास दिन अयोध्या के राम मंदिर में सूर्य तिलक का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। आइए जानते हैं राम लला को दोपहर में क्यों होता है सूर्य तिलक और क्यों निभाई जाती है ये परंपरा।

Ram Lalla Surya Tilak 2026: राम नवमी 2026 के मौके पर अयोध्या में रामलला का सूर्य तिलक एक बेहद खास और दिव्य आयोजन के रूप में सामने आया। यह केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि विज्ञान और परंपरा का अनोखा संगम भी है। राम मंदिर निर्माण के बाद ये परंपरा चलन में आई है। जब हर वर्ष राम नवमी के दिन ठीक दोपहर के समय सूर्य की एक विशेष किरण मंदिर के गर्भगृह में पहुंचती है और भगवान रामलला के मस्तक पर तिलक के रूप में स्थापित होती है। इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु राम मंदिर में एकत्रित हुए। आइए जानते हैं राम लला को दोपहर में क्यों होता है सूर्य तिलक और क्यों निभाई जाती है ये परंपरा जानें इससे जुड़ी 5 बड़ी बातें।

Ram lalla surya tilak

राम लला का सूर्य तिलक

दोपहर में ही क्यों होता है सूर्य तिलक?

रामलला का सूर्य तिलक हमेशा दोपहर करीब 12 बजे किया जाता है, क्योंकि यही वह समय होता है जब सूर्य ठीक शीर्ष के पास होता है और उसकी किरणें सीधे और सबसे तेज रूप में धरती पर पड़ती हैं। इसी वजह से सूर्य की किरणें सटीक रूप से भगवान के मस्तक तक पहुंच पाती हैं। इसके पौराणिक मान्यता है कि अलावा भगवान राम का जन्म भी अभिजीत मुहूर्त में हुआ था, इसलिए दोपहर में सूर्य तिलक करने की परंपरा है।

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