Radha Rani Favorite Sabzi: राधा रानी का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले स्थित गोकुल के पास रावल गांव में हुआ था। यह राधारानी का ननिहाल था। इस कारण हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को राधा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। 2026 में राधा अष्टमी 19 सितंबर, शनिवार को मनाई जाएगी।
राधारानी का पसंदीदा भोग क्या है
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर करीब 3:26 बजे तक रहेगी। राधा अष्टमी की पूजा मध्याह्न काल में की जाती है। इस दिन बरसाना, वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में राधा रानी के लिए तरह-तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं। वहीं, इस दिन राधा रानी की सबसे पसंदीदा सब्जी भी बनाई जाती है। इस दिन राधारानी को उनकी मनपसंद सब्जी का भोग जरूर लगाना चाहिए।
राधा रानी को कौन सी सब्जी सबसे ज्यादा पसंद है
ब्रज की लोक-परंपरा में अरबी की सब्जी को राधा रानी का प्रिय भोग माना जाता है। राधा अष्टमी पर श्रीजी को अरबी की सब्जी अर्पित की जाती है। खासतौर पर दही वाली अरबी को राधा रानी के भोग में शामिल किया जाता है। ब्रज शैली में इसे सात्त्विक तरीके से तैयार किया जाता है।
दही वाली अरबी को आमतौर पर अरबी उबालकर, साफ करके दही और हल्के मसालों के साथ तैयार किया जाता है। भोग के लिए प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। कई पारंपरिक विधियों में देसी घी, दही, अजवाइन, काली मिर्च, हरी मिर्च और धनिया जैसी सामग्री इस्तेमाल होती है।
अरबी के अलावा राधा रानी को क्या भोग लगाएं
राधा अष्टमी की भोग थाली में केवल अरबी ही रखना जरूरी नहीं है। भक्ति परंपरा में सात्त्विक और घर में श्रद्धा से तैयार किए गए कई व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। पंचामृत भोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से तैयार पंचामृत पूजा में भी इस्तेमाल होता है और भोग के रूप में भी अर्पित किया जाता है। राधा रानी को खीर भी काफी पसंद है। चावल, दूध, चीनी, केसर और सूखे मेवों से बनी खीर भी श्रीजी को अर्पित की जाती है। इसके अलावा मालपुआ, माखन, मिश्री, फल और दूसरी सात्त्विक मिठाइयां भी भोग में लगाई जा सकती हैं।
राधा अष्टमी पर कैसी होनी चाहिए भोग की थाली
अगर घर पर राधा अष्टमी के दिन श्रीजी के लिए भोग तैयार कर रहे हैं तो थाली में दही वाली अरबी को मुख्य नमकीन भोग के रूप में रखा जा सकता है। इसके साथ खीर, पंचामृत, मालपुआ, माखन-मिश्री और मौसमी फलों को शामिल किया जा सकता है।
राधा रानी को भोग लगाने की सही विधि
राधा अष्टमी के दिन घर के मंदिर में राधा रानी और श्रीकृष्ण की प्रतिमा या तस्वीर के सामने पूजा की जाती है। अगर आपके पास राधारानी की तस्वीर नहीं है तो श्रीकृष्ण को ही राधारानी मानकर पूजन कर सकते हैं। श्रीजी को चंदन, रोली, फूल, माला, धूप और दीप अर्पित करने के बाद तैयार किया गया भोग श्रीजी के सामने रखा जाता है।
सबसे पहले दही वाली अरबी, खीर और पंचामृत जैसे भोग अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद फल और मिठाई रखें। भोग लगाते समय राधा-कृष्ण के नाम का स्मरण और भजन-कीर्तन किया जा सकता है। पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
