Phalgun Purnima Vrat Katha: फाल्गुन पूर्णिमा व्रत कथा, यहां पढ़ें हिरण्यकश्यप- भक्त प्रह्लाद और होलिका की कहानी

Phalgun Purnima Vrat Katha In Hindi (फाल्गुन मास पूर्णिमा व्रत कथा): धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी दिन होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाई जाती है। इसकी कथा असुर राज हिरण्यकश्यप, उनके पुत्र प्रह्लाद और होलिका से जुड़ी है, जिसे आप यहां से पढ़ सकते हैं।

Phalgun Purnima Vrat Katha In Hindi (फाल्गुन मास पूर्णिमा व्रत कथा): फाल्गुन पूर्णिमा की व्रत कथा के अनुसार प्राचीन समय में महर्षि कश्यप की पत्नी दिति के गर्भ से दो पराक्रमी असुर भाइयों हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप का जन्म हुआ। दोनों अत्यंत शक्तिशाली और महत्वाकांक्षी थे। उन्होंने अपने बल के दम पर देवताओं को परास्त कर स्वर्ग लोक पर अधिकार कर लिया। उनके अत्याचारों से देवता भयभीत हो उठे और चारों ओर अशांति फैल गई।

फाल्गुन पूर्णिमा की व्रत कथा (pc: canva)

देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण किया और हिरण्याक्ष का वध कर दिया। अपने भाई की मृत्यु से क्रोधित हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु को अपना घोर शत्रु मान लिया। उसने प्रतिशोध लेने का निश्चय किया और ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या में लीन हो गया।

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