परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ने से हर पाप से मिल जाएगी मुक्ति

परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहते हैं। जिसे पार्श्व एकादशी, जल झुलनी एकादशी और देवझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है इस एकादशी का व्रत करने से बड़े से बड़े पाप तक से छुटकारा मिल जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी का व्रत इस साल 14 सितंबर को रखा जाएगा। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना गया है। इसे पद्मा एकादशी, जयंती एकादशी, जल झुलनी एकादशी, देवझूलनी एकादशी और वामन एकादशी समेत कई नामों से जाना जाता है। ये एकादशी व्रत सभी पापों का नाश करता है और मरने के बाद बैकुंठ धाम की प्राप्ति कराता है। परिवर्तिनी एकादशी पर श्री हरि विष्णु भगवान के वामन अवतार की पूजा की जाती है। साथ ही इसकी पौराणिक कथा भी जरूर पढ़ी जाती है। चलिए जानते हैं परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा।

Parivartini Ekadashi Vrat Katha

Parivartini Ekadashi Vrat Katha In Hindi

पार्श्व एकादशी व्रत कथा

परिवर्तिनी एकादशी की कथा अनुसार त्रेतायुग में बलि नामक एक दैत्य था। जो भगवान विष्णु का परम भक्त था। वो विविध प्रकार के वेद सूक्तों से श्री हरि विष्णु का पूजन किया करता था और प्रतिदिन ही ब्राह्मणों का पूजन कर यज्ञ का आयोजन करता था। लेकिन उसने इंद्रलोक तथा सभी देवताओं को जीत लिया था। इससे परेशान होकर सभी देवता भगवान के पास गए और उनसे प्रार्थना करने लगे। तब भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण करके अपना पांचवां अवतार लिया। वामन रूपधारी ब्रह्मचारी बनकर श्री हरि विष्णु भगवान ने बलि से तीन पग भूमि की याचना की।

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