Parenting Tips: समाज में एक कहावत काफी ज्यादा है, बेटियां दो घरों की इज्जत होती हैं। इसी पंक्ति काे कहते− कहते ही बेटियों की परवरिश की जाती है। बेटियों पर बचपन से ही दो परिवारों को ससुराल और मायका संभालने का दबाव बना दिया जाता है। धीरे− धीरे समाज की ये सोच बहुत बड़ा कारण बन जाती है उनके व्यवहार में परिवर्तन का। गुस्सैल और चिड़चिड़ा स्वभाव कब बेटियों की सौम्यता को लील लेता है पता ही नहीं चल पाता। जब बात हद से ज्यादा बढ़ जाती है तो माता पिता उपाय खाेजते हैं। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं बिटिया के गुस्से का आसान सा समाधान।
बेटी के गुस्सैल व्यवहार दूर करने के लिए उपाय
इस तरह करें बच्चियों का गुस्सा नियंत्रण
- शनि, मंगल, राहु खराब होने के कारण बच्चियां ज्यादा गुस्सा करती हैं। चंद्रमा पर इन ग्रहों के प्रभाव से भी ये होता है। इससे वैवाहिक जीवन खराब हो सकता है। वाणी दोष होगा और बच्ची का गुस्सा बढ़ेगा।
- गर्भावस्था के दौरान मां द्वारा चाय− काफी लेने से, स्मोकिंग के कारण से बच्चियों को परेशानी होती है। यह परेशानी डिस्आर्डर का रूप ले लेती है। बच्चियां मां से ज्यादा झगड़ेंगी। पित्त बढ़ने से मानसिक परेशानियां भी बढेंगी।
- बच्चियों का वजन ज्यादा कम या बहुत बढ़ रहा हो तो अहं बढ़ेगा।
- शुद्ध कपूर, गुग्गल घर में जलाएं और घंटी बजाएं।
- बच्ची काे चांदी के गिलास में पानी पिलाएं।
- मां बच्चियों के निजी जीवन में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप न करें।
- राहु, मंगल, शनि के कारण उर्जा ज्यादा होती है। बच्चियों को दौड़ने− भागने के लिए भेजें। खेल−कूद में भेजें। तला हुआ भाेजन न खाएं। भाेजन हल्का ही करें। कच्चा प्याज न लें। चाय− काफी न पिएं। सिगरेट के धुएं से दूर रहें। ध्यान लगाएं।
- सोते समय पानी के साथ थाेड़ा सा लहसुन खाएं। शहद का सेवन दूध के साथ करें। हल्दी के साथ दूध का सेवन करें। आधा चम्मच मेथी दाना को भिगाेएं और सुबह उसका जल पिएं।
- काले, नीले रंग न पहनें, सफेद रंग पहनें तो बेहतन है।
- चांदी का ज्यादा इस्तेमाल करें। खजूर, च्यवनप्राश का ज्यादा सेवन करें।
- ज्यादा गर्म भाेजन न करें। दिन में दही का सेवन करें। दिन में थाेड़ा थाेड़ा भाेजन करें, इससे नींद नहीं आएगी। हाथ में अगर ज्यादा पसीना आए तो पपीते का सेवन करें। पानी में पैर डालकर ध्यान लगाएं।
- खाली पेट सफेद मक्खन खाने से भी शुक्र अच्छा होता है।
- शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाने से गृहस्थ सुख की प्राप्ति होगी।
ये कुछ उपाय प्रतिदिन करने से बेटियों के गुस्से में शांति आ जाती है। सबसे बेहतर उपाय है कि माता पिता अपनी बेटी के साथ समय बिताएं। दोस्ताना माहौल रखें। बेटियों को बेटों से ज्यादा भावनात्मक अटेंशन की जरूरत होती है। तो उनकी विशेषकर टीन एज में मांएं बच्चियों को समझें। बात बात पर डांटे नहीं बल्कि समझाने का प्रयास करें।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
