Papmochani Ekadashi Katha: पापमोचनी एकादशी व्रत कथा, यहां पढ़ें सभी पापों का नाश करने वाली कामदेव और मेधावी ऋषि की कहानी

Papmochani Ekadashi Vrat Katha (पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा): चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहते हैं। आज की एकादशी का व्रत करने से उसके जन्म जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं तथा इंसान मोक्ष का हकदार हो जाता है। यहां से आप पापमोचनी एकादशी की कथा पढ़ सकते हैं।

Papmochani Ekadashi Vrat Katha (पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा): पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में चैत्ररथ नाम का एक बहुत खूबसूरत वन हुआ करता था। जिसमें च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी ऋषि तपस्या करते थे और इसी जंगल में देवराज इंद्र गंधर्व कन्याओं, अप्सराओं और देवताओं के साथ विचरण भी किया करते थे। इस वन में मेधावी नामक ऋषि थे जो शिव भक्त थे वहीं अप्सराएं शिवद्रोही कामदेव की अनुचरी हुआ करती थीं।

पापमोचनी एकादशी व्रत कथा (pc: pinterest)

एक दिन कामदेव ने मेधावी ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए मंजू घोषा नाम की एक बेहद सुन्दर अप्सरा को वन में भेजा। अप्सरा ने मुनि का ध्यान भंग कर दिया। मुनि मेधावी अप्सरा मंजूघोषा पर मोहित हो गए और इसके बाद दोनों ने साथ रहने का फैसला कर लिया। कई साल दोनों ने साथ में बिताए। फिर एक दिन जब अप्सरा ऋषि से वापिस जाने के लिए अनुमति मांगने लगी तो मेधावी ऋषि को अपनी भूल का एहसास हुआ। जिसके बाद उनके क्रोध का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने मंजूघोषा को पिशाचनी होने का श्राप दे डाला।

End of Feed