Panchang Today in Hindi for 28 May 2025, Wednesday: 28 मई को दिन बुधवार है और ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। बुधवार को श्री गणेश पूजा बहुत ही पुण्यदायी होता है। इस दिन बेल,बरगद व पीपल की पूजा करें। किसी शिव मंदिर परिसर में वृक्षारोपण करें। श्री गणेश उपासना करके विधिवत नियम पूर्वक दान पुण्य करने से पुण्य प्राप्ति होने की मान्यता है। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करें। उत्तर दिशा में यात्रा ना करें। आज बुध के बीज मंत्र का जप करें। आगे देखें बुधवार का पूरा पंचांग।
Panchang 28 May 2025
28 मई 2025, बुधवार का पंचांग
- संवत- विक्रम संवत 2082
- माह- ज्येष्ठ,शुक्ल पक्ष
- तिथि- द्वितीया
- पर्व- द्वितीया
- दिवस- बुधवार,
- सूर्योदय- 05:09 am
- सूर्यास्त- 7:08 pm
- नक्षत्र- मृगशिरा
- चन्द्र राशि- वृष स्वामी - शुक्र 01:37 pm तक, फिर राशि- मिथुन,स्वामी ग्रह -बुध
- सूर्य राशि- वृष
- करण- बालव 03:12 pm तक फिर कौलव
- योग- धृति 07:07 pm तक फिर शूल
28 मई 2025, बुधवार का शुभ मुहूर्त
- अभिजीत- नहीं है
- विजय मुहूर्त- 02:23pm से 03:25pm तक
- गोधुली मुहूर्त- 06:26pm से 07:27pm तक
- ब्रह्म मुहूर्त- 4:06m से 05:09am तक
- अमृत काल- 06:02am से 07:42am तक
- निशीथ काल मुहूर्त- रात्रि 11:41से 12:22तक रात
- संध्या पूजन- 06:20 pm से 07:08 pm तक
दिशा शूल- उत्तर दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं। यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त- राहुकाल-दोपहर 12 बजे से 01:30 बजे तक
क्या करें- जल भरा घड़ा व सप्त अन्न का दान करना बहुत फलित होता है। मन का निर्मल व सात्विक होना बहुत ही आवश्यक है। घर की छत पर विहंगों को दाना -पानी दें। श्री सूक्त का पाठ करें। विष्णु जी की उपासना से सभी कष्ट समाप्त होता है। आज बुध के बीज मंत्र का जप करें। आज मीठा व जल का दान -पुण्य अनन्त गुना फलदायी होता है। आज व्रत भी रख सकते हैं। बालक, वृद्ध व रोगी व्रत से बचें व केवल पूजा पाठ करें। भैरो उपासना कर बड़े बुजुर्गों आशीर्वाद लें। राहु दोष के शमन के लिए बटुक भैरव स्तोत्रम का पाठ करना बेहतर है। कुत्ते को बिस्किट, रोटी व भोजन दें। काग को रोटी खिलाएं। मन की निर्मलता व हृदय में भक्ति भाव रखते हुए भगवान कृष्ण नाम का संकीर्तन करें।
क्या न करें- अप्रिय वचन से किसी भी व्यक्ति के मन को कष्ट मत दें। मन की निर्मलता, हृदय की शुचिता व स्वभाव में सहजता-सरलता का समावेश अप्रभावित मत हो।
