Nirjala Ekadashi 2027 date: हिंदू पंचांग में आने वाली सभी एकादशियों का अपना महत्व है, लेकिन निर्जला एकादशी को विशेष रूप से सबसे पुण्यदायी एकादशी माना जाता है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। यहां आप निर्जला एकादशी 2027 में कब है की जानकारी ले सकते हैं। जानें भीमसेनी एकादशी 2027 किस दिन मनाई जाएगी। निर्जला एकादशी 2026 और निर्जला एकादशी 2027 की तारीखों में कितना अंतर है - आइए जानते हैं इस पवित्र व्रत से जुड़ी पूरी जानकारी।
2027 में कब आएगा निर्जला एकादशी का व्रत
निर्जला एकादशी 2027 कब है
द्रिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी 2027 का व्रत 14 जून 2027, सोमवार को रखा जाएगा। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि14 जून 2027 को प्रातः लगभग 2:11 बजे शुरू होगी और 15 जून 2027 को सुबह लगभग 2:07 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर निर्जला एकादशी का व्रत 14 जून, सोमवार को रखा जाएगा।
निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी और भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं और निर्जल रहकर व्रत रखते हैं।
निर्जला एकादशी क्यों कहलाती है भीमसेनी एकादशी
बहुत से लोग जानना चाहते हैं कि भीमसेन एकादशी कब है और इसका नाम भीमसेनी एकादशी क्यों पड़ा। इसके पीछे महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा बताई जाती है।
मान्यता है कि पांडवों में भीमसेन अत्यंत बलशाली थे, लेकिन उनके लिए नियमित उपवास करना कठिन था। जब महर्षि वेदव्यास ने सभी एकादशियों का महत्व बताया, तब भीमसेन ने ऐसा उपाय पूछा जिससे उन्हें सभी एकादशियों का फल मिल सके। तब उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर बिना अन्न और जल के व्रत रखने की सलाह दी गई। तभी से यह व्रत भीमसेनी एकादशी 2027 के नाम से भी प्रसिद्ध है।
निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व
निर्जला एकादशी व्रत केवल एक उपवास नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा और भक्ति का पर्व है। 'निर्जला' का अर्थ है जल का त्याग। इस दिन व्रती अन्न के साथ-साथ जल का भी सेवन नहीं करते।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा से निर्जला एकादशी व्रत करता है, उसे वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे सबसे कठिन और सबसे फलदायी एकादशी माना जाता है।
निर्जला एकादशी 2027 पर क्या करें
निर्जला एकादशी पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ या विष्णु मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
इस दिन तुलसी दल अर्पित करने का भी विशेष महत्व है। साथ ही जल, सत्तू, छाता, वस्त्र और फल का दान करने की परंपरा भी प्रचलित है। गर्मी के मौसम में जरूरतमंदों को पानी पिलाना भी पुण्यदायी कार्य माना जाता है।
निर्जला एकादशी 2027 पारण कब होगा
व्रत रखने के बाद अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण किया जाता है। 2027 में निर्जला एकादशी व्रत का पारण 15 जून को मंगलवार के दिन दोपहर 1:45 बजे से लेकर शाम 04:33 बजे के बीच में कर सकते हैं।
