हिंदू नव वर्ष पर क्यों खाए जाते हैं नीम और गुड़ एक साथ, जानें क्या है इस परंपरा की खास वजह

Naye saal par neem and gur kyon khate hai (hindu nav varsh Vikram samvat 2083): आज 19 मार्च 2026 से हिंदू नव वर्ष विक्रम संवत 2083 की शुरूआत हो गई है। इस पर्व को गुड़ी पड़वा के रूप में महाराष्ट्र में मनाया जाता है। साथ इस दिन गुड़ और नीम को एक साथ खाने की भी परंपरा है। जानें क्यों है ऐसा और क्यों नए साल पर यह कड़वा और मीठा एक साथ खाया जाता है।

Naye saal par neem and gur kyon khate hai (hindu nav varsh Vikram samvat 2083): भारत में हर त्योहार अपने साथ सिर्फ उत्सव ही नहीं, बल्कि गहरी परंपराएं और जीवन से जुड़ी सीख भी लेकर आता है। ऐसा ही एक खास पर्व है गुड़ी पड़वा, जिसे महाराष्ट्र समेत कई हिस्सों में नए साल की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घर-घर में गुड़ी स्थापित की जाती है और एक खास परंपरा निभाई जाती है—नीम और गुड़ का सेवन।

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गुड़ी पड़वा पर क्यों गुड़ और नीम साथ खाते हैं

गुड़ी पड़वा क्या है

गुड़ी पड़वा हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाता है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आता है। इस दिन से वसंत ऋतु के साथ नए साल का आगाज़ होता है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी। महाराष्ट्र में लोग अपने घर के बाहर गुड़ी (ध्वज) लगाते हैं, जो विजय, समृद्धि और शुभता का प्रतीक होती है।

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