दुर्गा अष्टमी पर कैसे करें कन्या पूजन और हवन, जानिए संपूर्ण जानकारी यहां
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी यानी कि आठवां दिन मां आदिशक्ति के महागौरी रूप को समर्पित है। इस दिन भक्त व्रत, हवन, कन्या पूजन और विभिन्न अनुष्ठान करते हैं। महागौरी को श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, करुणामयी और शुभ्र स्वरूप वाली देवी माना जाता है, जो भक्तों को शांति और समृद्धि प्रदान करती हैं।
चैत्र नवरात्रि की महा अष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। ये पर्व मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की आराधना को समर्पित होता है। महागौरी को सफेद वस्त्र धारण करने वाली, असीम करुणामयी और सौम्य स्वरूप वाली देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इनकी पूजा करने से भक्तों के समस्त पाप और कष्ट नष्ट हो जाते हैं, तथा उन्हें सुख, यश और वैभव की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत-उपवास रखने वाले भक्त विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हैं। इस दिन के कन्या पूजन का भी अत्यधिक महत्व माना जाता है, जिसमें कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर भोजन कराया जाता है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। इस दिन यज्ञ और हवन का भी आयोजन किया जाता है, जिससे घर और वातावरण की नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। महा अष्टमी केवल एक त्योहार नहीं बल्कि शक्ति और भक्ति का संगम है, जो हर मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
Navratri Ashtami Hawan Muhurat 2025
Maha Ashtami Puja Vidhi (महा अष्टमी पूजा विधि)
महा अष्टमी की पूजा में, सबसे पहले स्नान करें, मंदिर को साफ करें, मां दुर्गा का गंगाजल से अभिषेक करें और उन्हें अक्षत, लाल चंदन, चुनरी, लाल पुष्प, फल और मिठाई अर्पित करें। धूप, दीपक जलाएं, दुर्गा चालीसा का पाठ करें, आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
Maha Ashtami Puja Muhurat 2025 (महा अष्टमी पूजा मुहूर्त 2025)
महा अष्टमी पूजा शुभ मुहूर्त 5 अप्रैल की सुबह 6 बजकर 7 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
Maa Mahagauri Katha (मां महागौरी की कथा)
देवी भागवत पुराण के अनुसार, माता पार्वती अपनी तपस्या के दौरान केवल कंदमूल फल और पत्तों का आहार करती थीं। बाद में माता ने केवल वायु पीकर ही तप करना आरंभ कर दिया था। तपस्या से माता पार्वती को महान गौरव प्राप्त हुआ है और इससे उनका नाम महागौरी पड़ा। माता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनको गंगा में स्नान करने के लिए कहा। जिस समय माता पार्वती गंगा में स्नान करने गईं, तब देवी का एक स्वरूप श्याम वर्ण के साथ प्रकट हुआ, जो कौशिकी कहलाईं और एक स्वरूप उज्ज्वल चंद्र के समान प्रकट हुआ, जो महागौरी कहलाईं। मां गौरी अपने हर भक्तों का कल्याण करती हैं और उनकी सभी समस्याओं से मुक्ति दिलाती हैं। देवी भागवत पुराण के अनुसार, महागौरी का वर्ण रूप से गौर अर्थात सफेद हैं और इनके वस्त्र व आभूषण भी सफेद रंग के ही हैं। मां का वाहन वृषभ अर्थात बैल है, जो भगवान शिव का भी वाहन है। मां का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाले हाथ में त्रिशुल है। महागौरी के ऊपर वाले हाथ में डमरू है। डमरू धारण करने के कारण मां को शिवा के नाम से भी जाना जाता है। मां का नीचे वाला हाथ अपने भक्तों को अभय देता हुआ वर मुद्रा में हैं और मां शांत मुद्रा में दृष्टिगत है।
Maa Mahagauri Mantra (मां महागौरी मंत्र)
- या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
- वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृतशेखराम्। सिंहारूढा चतुर्भुजा महागौरी यशस्विनीम्
- श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा
- सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोsस्तुते
- ऊँ देवी महागौर्यै नमः
Maa Mahagauri Shubh Rang (मां महागौरी शुभ रंग)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां महागौरी को सफेद और गुलाबी रंग बेहद प्रिय होता है। इस नाते नवरात्रि की महा अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा के दौरान इन रंगों के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
Maa Mahagauri Ka Bhog (मां महागौरी का भोग)
मां महागौरी को नारियल से बनी मिठाइयां, हलवा, काले चने का भोग लगाना उचित माना जाता है। इसके अलावा, पूजा थाली में लड्डू, फल, मिठाई आदि चीजें भी शामिल की जा सकती हैं।
Mata Mahagauri Ki Aarti (माता महागौरी की आरती)
॥ आरती देवी महागौरी जी की ॥
जय महागौरी जगत की माया। जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहा निवास॥
चन्द्रकली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय माँ जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता। कौशिक देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती (सत) हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी माँ ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥
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जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी - आरती (Jai Ambe Gauri Maiya Jai Shyama Gauri)
मैया जय श्यामा गौरी ।
तुमको निशदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
मांग सिंदूर विराजत,
टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना,
चंद्रवदन नीको ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै ।
रक्तपुष्प गल माला,
कंठन पर साजै ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
केहरि वाहन राजत,
खड्ग खप्पर धारी ।
सुर-नर-मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर,
सम राजत ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे,
महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना,
निशदिन मदमाती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे ।
मधु-कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी,
तुम कमला रानी ।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत,
नृत्य करत भैरों ।
बाजत ताल मृदंगा,
अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
तुम ही जग की माता,
तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता ।
सुख संपति करता ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
भुजा चार अति शोभित,
वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]
मनवांछित फल पावत,
सेवत नर नारी ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कंचन थाल विराजत,
अगर कपूर बाती ।
श्रीमालकेतु में राजत,
कोटि रतन ज्योती ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
श्री अंबेजी की आरति,
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी,
सुख-संपति पावे ॥
ॐ जय अम्बे गौरी..॥
जय अम्बे गौरी,
मैया जय श्यामा गौरी ।
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Navratri 8th Day Vrat Katha In Hindi, नवरात्रि के आठवें दिन की व्रत कथा
मां महागौरी से संबंधित दूसरी कथा के अनुसार शुंभ और निशुंभ दो राक्षस पृथ्वी पर तबाही मचाने लगे थे। जिसका अंत केवल देवी ही कर सकती थीं। तब भगवान ब्रह्मा की सलाह पर भगवान शिव ने देवी पार्वती की त्वचा को काला कर दिया। देवी पार्वती ने अपना रूप रंग फिर से प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की। तब भगवान महादेव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें मानसरोवर में स्नान करने की सलाह दी। मानसरोवर के जल में स्नान करने से देवी पार्वती की काली छवि फिर से श्वेत हो गई। माता के इस रूप को कौशिकी कहा गया।
नवरात्रि महा अष्टमी पूजन विधि (Navratri Ashtami Puja Vidhi)
- नवरात्रि व्रत की अष्टमी तिथि को सुबह स्नान के बाद सफेद रंग के वस्त्र धारण करें।
- उसके बाद मां महागौरी की उपासना करें।
- इस दिन माता को सफेद रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
- माता के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
- उसके बाद माता रानी को कुमकुम का तिलक लगाएं और उन्हें पंचमेवा अर्पित करें।
- अंत में मााता महागौरी की कथा का पाठ करें और उनकी आरती करें।
- इस दिन कई श्रद्धालु हवन पूजन और कन्या पूजन भी करते हैं।
- पूजा के बाद प्रसाद सभी में बांट दें।
चैत्र नवरात्रि 2025 का अंतिम दिन (Chaitra Navratri 2025 End Date)
Navratri 2025 Ashtami (8th Day) Mahagauri Puja Vidhi LIVE: नवरात्रि अष्टमी पर कन्या पूजन
Navratri 2025 Ashtami (8th Day) Mahagauri Puja Vidhi LIVE: नवरात्रि महा अष्टमी पूजन विधि
उसके बाद मां महागौरी की उपासना करें।
इस दिन माता को सफेद रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
माता के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
उसके बाद माता रानी को कुमकुम का तिलक लगाएं और उन्हें पंचमेवा अर्पित करें।
अंत में मााता महागौरी की कथा का पाठ करें और उनकी आरती करें।
इस दिन कई श्रद्धालु हवन पूजन और कन्या पूजन भी करते हैं।
पूजा के बाद प्रसाद सभी में बांट दें।
