Muharram 2023 Date, Muharram Kab Hai (मुहर्रम कब है): मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है या कहें कि मुहर्रम से इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत होती है। हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम जहां बेहद अहम माना गया है वहीं इसकी दसवीं (10) तारीख और भी ज्यादा मायने रखती है। मुहर्रम महीने की दस तारीख को कर्बला की जंग में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। कर्बला की जंग (Battle of Kerbala) हजरत इमाम हुसैन और यजीद की सेना के बीच हुई थी जिसमें में उनके 72 साथियों को भी शहीद कर दिया गया था। मुहर्रम की दस तारीख को बड़ी तादाद में मातम मनाया जाता है। यह मातम हजरत इमाम हुसैन की शहादत के गम में मनाया जाता है। जानिए 2023 में कब है मुहर्रम का मातम।
Muharram 2023 Date, Muharram Kab Hai
Muharram Ka Matam Kab Hai
मुहर्रम में मुसलमान हजरत इमाम हुसैन की इसी शहादत को याद करते हैं। वहीं, शिया मुस्लिम समुदाय के लोग 10 तारीख को बड़ी तादाद में ताजिया और जुलूस निकालकर गम मनाते हैं और अफसोस जताते हैं कि उस जंग में वे क्यों ना हुए। इस साल यौम-ए-आशूरा 29 जुलाई को होगा। मुहर्रम ताजिया जुलूस आज यानी 28 जुलाई को निकाला जा रहा है। कई स्थानों में ताजिया जुलूस 29 जुलाई को निकाला जाएगा।
कर्बला की जंग का इतिहास Battle of Kerbala
कर्बला की जंग 1400 साल पहले हुई थी। यजीद नाम के शासक ने खुद को खलीफा घोषित कर दिया था और लोगों पर सितम ढाने शुरू किए।वह हजरत इमाम हुसैन से अपनी स्वाधीनता स्वीकार कराना चाहता था, इसलिए उसे इमाम हुसैन पर परेशान किया। इसके बाद इमाम हुसैनपरिवार की रक्षा के लिए उन्हें लेकर मक्का हज पर जाने का फैसला किया। लेकिन यजीद के सैनिक उन्हें पकड़कर कर्बला ले गए। कर्बला में इमाम हुसैन पर बेहद जुल्म किया गया और उनके परिवार के पानी पीने तक पर रोक लगा दी गई। यजीद की सेना ने उन्हें यातनाएं दीं लेकिन वह आखिरी सांस तक गलत के खिलाफ लड़ते रहे।
