march mein Chaturthi kab hai (मार्च में कौन सी चतुर्थी का व्रत है): मार्च 2026 में चैत्र नवरात्र के बीच गणेश चतुर्थी का व्रत आता है। यह व्रत बहुत कृपा वाला माना जाता है। मार्च में वासुदेव चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा जो कि चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को आता है। यहां देखें कि यह व्रत 21 या 22 मार्च में से कब रखा जाएगा। क्या है इस व्रत की मान्यता।
21 या 22 मार्च में चैत्र शुक्ल चतुर्थी कब है
21 या 22 मार्च में चैत्र शुक्ल चतुर्थी कब है
पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 22 मार्च 2026, रविवार को मनाई जाएगी। दरअसल, चतुर्थी तिथि की शुरुआत 21 मार्च को रात 23:56 बजे से हो रही है और इसका समापन मार्च 22, 2026 को 21:16 बजे पर होगा। ऐसे में उदय तिथि को देखते हुए मार्च के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का व्रत 22 मार्च को ही रखा जाएगा। द्रिक पंचांग के अनुसार, वासुदेव चतुर्थी 2026 का मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:15 से दोपहर 13:41 बजे के बीच का रहेगा।
मार्च में कौन सी चतुर्थी आती है
मार्च 2026 में दो प्रमुख चतुर्थी आती हैं। 2026 में 7 मार्च को कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी आई थी और अब 22 मार्च को शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इनमें से 22 मार्च की शुक्ल पक्ष वाली वासुदेव चतुर्थी अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह नववर्ष और नवरात्रि के दौरान आती है।
चैत्र शुक्ल पक्ष की 22 मार्च की चतुर्थी का नाम
चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को वासुदेव चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के वासुदेव स्वरूप की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
22 मार्च की चतुर्थी का चांद कब निकलेगा
इस चतुर्थी में संकष्टी की तरह चंद्र दर्शन अनिवार्य नहीं होता, लेकिन चंद्रमा देखने से पहले कुछ समय का परहेज रखा जाता है। पंचांग के अनुसार 22 मार्च को सुबह 08:14 से रात 22:15 बजे तक चंद्र दर्शन नहीं करने हैं। चांद को ना देखने की अवधि इस दिन करीब 14 घंटे की रहेगी। हालांकि इसके बाद चंद्र दर्शन किया जा सकता है।
वासुदेव चतुर्थी का व्रत कैसे करें
इस दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करें। दोपहर के समय (मध्यान्ह काल) में पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। गणपति अथर्वशीर्ष, संकट नाशन स्तोत्र या ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। व्रत कथा सुनने के बाद आरती करें और अगले दिन पंचमी को व्रत का पारण करें। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने पर भगवान गणेश सभी विघ्न दूर करते हैं और हर कार्य में सफलता दिलाते हैं।
