Makar Sankranti Katha: शनि और सूर्य देव की कहानी, मकर संक्रांति पर जरूर पढ़ें ये कथा

Makar Sankranti Ki Katha: मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की पूजा की जाती है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर पुत्र शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में प्रवेश करते हैं। दोनों ग्रहों के बीच पिता और पुत्र का संबंध होने के बावजूद विपरीत स्वभाव है। यहां से आप मकर संक्रांति की कथा पढ़ सकते हैं।

Makar Sankranti Ki Katha: श्रीमद्भागवत के अनुसार, सूर्यदेव की दो पत्नियां मानी जाती हैं। एक का नाम छाया है और दूसरी का नाम संज्ञा। संज्ञा को भगवान विश्वकर्मा की पुत्री बताया गया है। विवाह के बाद सूर्य के तेज को सहन न कर पाने के कारण संज्ञा ने अपनी छाया को सूर्य के पास छोड़ दिया और स्वयं तपस्या के लिए वन चली गईं। छाया से कर्म और न्याय के देवता शनिदेव हुए और संज्ञा से धर्म और न्याय के देवता यमराज हुए।

शनि और सूर्य देव की कहानी (pc: canva)

कथा के अनुसार, छाया ने अपने पुत्र शनि देव को अधिक स्नेह दिया। सूर्य देव ने छाया को अपनी दूसरी पत्नी संज्ञा के पुत्र यमराज से भेदभाव करते देख लिया था। इस बात से नाराज होकर सूर्य देव ने संज्ञा और उनके पुत्र शनि को अपने से अलग कर दिया था। इससे शनि देव और उनकी माता छाया ने सूर्य देव से आहत होकर उन्हें कुष्ठ रोग का शाप दे दिया था। इसके कारण सूर्य देव का कुछ समय के लिए तेज और प्रभाव कम हो गया। इसी कारण सूर्य और शनि को एक-दूसरे का शत्रु ग्रह माना गया है।

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