Mahashivratri 2024 Char Prahar Puja Time: महाशिवरात्रि, हिंदुओं का बड़ा पर्व है। इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव के साथ माता पार्वती की भी पूजा करते हैं। मान्यता है इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भोलेनाथ की अराधना करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। महाशिवरात्रि पर आप किसी भी समय पूजा कर सकते हैं। लेकिन इस दिन शिव पूजा के लिए रात्रि का समय सबसे शुभ माना जाता है। यहां देखिए महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त।
Mahashivratri 2024 Char Prahar Time
Char Prahar Puja Benefits (शिवरात्रि पर चार पहर की पूजा के फायदे)
महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा बेहद शुभ और फलदायी मानी जाती है। ये पूजा शाम से शुरू होकर ब्रह्म मुहूर्त तक चलती है। कई लोग महाशिवरात्रि के दिन एक प्रहर ही पूजा करते हैं तो कई चारों प्रहर। यहां जानिए चारों प्रहर पूजा का समय और पूजा विधि।
Maha Shivratri Char Prahar Puja Time 2024 (महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा समय 2024)
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय 06:25 पी एम से 09:28 पी एम तक
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय 09:28 पी एम से 9 मार्च को 12:31 ए एम तक
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय 9 मार्च को 12:31 ए एम से 03:34 तक
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय 9 मार्च को 03:34 ए एम से 06:37 ए एम तक
Maha Shivratri Puja Muhurat 2024 (महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त 2024)
महाशिवरात्रि पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 8 मार्च की देर रात 12:07 से 12:56 बजे तक रहेगा। चतुर्दशी तिथि का प्रारम्भ 8 मार्च 2024 को 09:57 पी एम से होगा और इसकी समाप्ति 9 मार्च 2024 को 06:17 पी एम पर होगी।
Maha Shivratri Char Prahar Puja Vidhi (महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा विधि)
-महाशिवरात्रि पर पहले पहर की पूजा में शिव जी को दूध अर्पित करते हैं। जल की धारा से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। इस दौरान शिव मंत्र का जप कर सकते हैं।
-महाशिवरात्रि पर दूसरे पहर की पूजा में शिव जी को दही अर्पित की जाती है। साथ ही जल धारा से अभिषेक किया जाता है। इस पहर में भी शिव मंत्र का जप करें।
-महाशिवरात्रि के तीसरे पहर की पूजा में भगवान शिव को घी अर्पित करना चाहिए। इसके बाद जल धारा से अभिषेक करना चाहिए। इस पहर में शिव स्तुति करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
-महाशिवरात्रि के चौथे पहर की पूजा में शिव जी को शहद अर्पित करना चाहिए। इसके बाद जल धारा से अभिषेक करते हैं। इस पहर में शिव मंत्र का जप और स्तुति जरूर करें।
