Shardiya Navratri Hawan Muhurat, Vidhi 2025: शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन 30 सितंबर 2025 महानवमी पर हवन करने से माता की कृपा प्राप्त होती है, जो भक्तों को सिद्धियां, सुख, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति प्रदान करती है। हवन एक पवित्र अग्निकर्म है, जो नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है और सकारात्मकता को बढ़ाता है। महानवमी पर हवन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह नवरात्रि की पूजा का समापन और माता की कृपा का आह्वान करने का अंतिम अवसर होता है।
महानवमी पर हवन की विधि (Pic Credit- pexels)
‘दुर्गा सप्तशती’ के अनुसार, हवन से माता सिद्धिदात्री प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह नकारात्मक शक्तियों, जैसे नजर दोष और शत्रु भय, को नष्ट करता है। हवन के धुएं से वातावरण शुद्ध होता है और मंत्रों की शक्ति से आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। महानवमी का हवन विशेष रूप से संतान सुख, स्वास्थ्य, धन और मोक्ष के लिए फलदायी माना जाता है। इस दिन माता को सात्विक सामग्री से आहुति दी जाती है, जो भक्तों के जीवन में सुख-शांति लाती है।
नवरात्रि हवन मुहूर्त 2025
नवरात्रि की नवमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त 1 अक्टूबर की सुबह 06:29 से शाम 06:27 बजे तक रहेगा। इस दौरान आप कभी भी कन्या पूजन और हवन पूजन कर सकते हैं।
हवन की विधि
महानवमी पर हवन की प्रक्रिया विधिवत और सात्विक होनी चाहिए। इसके लिए प्रातःकाल स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र लाल या पीले रंग के पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और एक हवन कुंड स्थापित करें। हवन कुंड में आम की लकड़ी और कपूर रखें। हवन कुंड के चारों ओर स्वास्तिक बनाकर शुद्ध घी छिड़कें। माता दुर्गा की मूर्ति या चित्र को लाल कपड़े पर स्थापित करें और उनका गंगाजल, दूध, दही और शहद से अभिषेक करें। माता को लाल फूल, कुमकुम, अक्षत और चुनरी अर्पित करें। घी का दीपक और धूप जलाएं। ‘दुर्गा सप्तशती’ के नवम अध्याय या ‘सिद्धिदात्री कवच’ का पाठ करें। इसके बाद, हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करें और इन मंत्रों के साथ आहुति दें।
हवन के लिए मंत्र
महानवमी पर हवन अगर आप अकेले कर रहे हैं तो हवन सामग्री में अच्छे से देसी घी मिला लें। अगर दो या दो से अधिक लोग हवन कर रहे हैं तो एक घी की आहुति दे और बाकी हवन सामग्री से आहुति देते रहें।
1. शुद्धि और संकल्प
सबसे पहले आचमन और संकल्प मंत्र बोले जाते हैं।
आचमन मंत्र:
ॐ केशवाय नमः।
ॐ नारायणाय नमः।
ॐ माधवाय नमः।
संकल्प मंत्र:
ॐ विष्णवे नमः संकल्पं समर्पयामि।
2. गणेश वंदन
हवन प्रारंभ करने से पहले गणेश जी की प्रार्थना करें।
गणेश मंत्र:
ॐ गं गणपतये नमः। (11 बार आहुति दें)
अग्नि देव मंत्र
ॐ अग्नये स्वाहा। अग्नये इदं न मम।
कुलदेवता मंत्र
ॐ कुलदेवताभ्यो नमः स्वाहा।
इष्ट देवता हवन मंत्र
ॐ विष्णवे स्वाहा।
ॐ शिवाय स्वाहा।
ॐ ब्रह्माय स्वाहा।
नवग्रह मंत्र
ॐ ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी, भानुः शशि भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहु केतवः, सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु। स्वाहा।
ॐ ऋषिभ्यो नमः स्वाहा।
ॐ देवताभ्यो नमः स्वाहा।
ॐ मातृभ्यो नमः स्वाहा।
4. मुख्य देवी मंत्र (दुर्गा मंत्र)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा।
5. नवदुर्गा मंत्र
ॐ शैलपुत्र्यै नमः स्वाहा।
ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमः स्वाहा।
ॐ चन्द्रघण्टायै नमः स्वाहा।
ॐ कूष्माण्डायै नमः स्वाहा।
ॐ स्कन्दमातायै नमः स्वाहा।
ॐ कात्यायन्यै नमः स्वाहा।
ॐ कालरात्र्यै नमः स्वाहा।
ॐ महागौर्यै नमः स्वाहा।
ॐ सिद्धिदात्र्यै नमः स्वाहा।
6. सप्तशती मंत्र (बीज मंत्र से आहुति)
‘ॐ सर्वं स्वरूपे सर्वे सर्वशक्तिसमन्विते। भये भ्यस्त्राहि नो देवी दुर्गे नमस्तुते स्वाहा’
ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः स्वाहा।
7. ॐ सर्वमङ्गल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते।।
स्वाहा।।
नवर्ण मंत्र: ‘ॐ नमो भगवती ऐं ह्रीं क्लीं महादुर्गायै स्वाहा’ – यह मंत्र सभी बाधाओं को दूर करने के लिए है।
पूर्ण आहुति मंत्र
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते स्वाहा।
इन मंत्रों से कम से कम 108 आहुतियां दें और प्रत्येक आहुति के साथ मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और श्रद्धापूर्वक करें। हवन के बाद माता की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना करें, जिसमें पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए माता से क्षमा मांगें। सभी सामग्रियों को शुद्ध और ताजा रखें। हवन सामग्री को एक थाली में मिलाकर रखें और प्रत्येक आहुति के लिए थोड़ा-थोड़ा उपयोग करें। पूर्णाहुति के लिए सूखे नारियल को घी में डुबोकर ऊपर लिखे पूर्ण आहुति मंत्र के साथ अर्पित करें।
हवन के नियम और सावधानियां
महानवमी पर हवन करते समय कुछ नियम और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है, ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो। हवन स्थल को साफ और शुद्ध रखें और गंगाजल से छिड़काव करें। हवन कुंड को पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित करें। हवन के दौरान शांत और सात्विक मन बनाए रखें और अनावश्यक बातचीत से बचें। मंत्रों का उच्चारण स्पष्ट और सही करें, क्योंकि गलत उच्चारण से पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। हवन सामग्री को पहले माता को अर्पित करें, फिर अग्नि में डालें। हवन के बाद अग्नि को स्वयं बुझने दें और राख को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें या घर के पौधों में डालें। हवन के दौरान सिर ढककर रहें।
