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नवरात्रि महा नवमी पर कैसे करें हवन, क्या रहेगा पूजा का मुहूर्त, जानें सबकुछ यहां

नवरात्रि महा नवमी पर कैसे करें हवन, क्या रहेगा पूजा का मुहूर्त, जानें सबकुछ यहां
नवरात्रि महा नवमी पर कैसे करें हवन, क्या रहेगा पूजा का मुहूर्त, जानें सबकुछ यहां

आज शारदीय नवरात्रि की महा नवमी मनाई जा रही है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार मां सिद्धिदात्री की पूजा से भक्तों के सारे दुख दूर हो जाते हैं और ज्ञान में वृद्धि होती है। नवमी तिथि पर कन्या पूजन का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन कई लोग हवन भी करते हैं। यहां आप जानेंगे महा नवमी की संपूर्ण पूजा विधि और शुभ मुहूर्त।

नवरात्रि 2022 महा नवमी पूजा विधि और मुहूर्त (Navratri 2022 Maha Navami Puja Vidhi And Muhurat)

  • महा नवमी 4 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती है।
  • महा नवमी 3 अक्टूबर को शाम 04:37 बजे से शुरू होगी और इसकी समाप्ति 4 अक्टूबर को दोपहर 02:20 बजे होगी।
  • नवरात्रि व्रत का पारण 4 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 20 मिनट के बाद किया जा सकेगा।

महा नवमी पर कन्या पूजा का शुभ मुहूर्त (Navratri Maha Navami Kanya Puja Muhurat)
  • अभिजित मुहूर्त - सुबह 11:52 से दोपहर 12:39 तक
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 05:58 PM से शाम 06:22 तक
  • अमृत मुहूर्त - शाम 04:52 से शाम 06:22 तक
  • रवि योग- पूरे दिन



महा नवमी हवन पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

कन्या पूजन विधि (Kanya Pujan Vidhi)
  • कन्याओं को हलवा-पूड़ी या खीर-पूड़ी परोसने से पहले मां दुर्गा को भोग अवश्य लगाएं।
  • महा नवमी पर शुभ मुहूर्त में कन्याओं को घर पर बुलाएं।
  • सबसे पहले उन्हें स्वच्छ स्थान पर बिठाएं और उनके चरण धोएं।
  • कन्याओं के माथे पर तिलक लगाएं और हाथ में कलावा बांधें।
  • फिर कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें अपनी इच्छानुसार वस्त्र, उपहार और दक्षिणा भेंट करें।
  • अंत में कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।
  • मान्यता है कि जो सच्चे मन से कन्या पूजन करता है उसके घर में हमेशा सुख-समृद्धि का वास रहता है।

OCT 04, 2022 09:41 IST

माँ सिद्धिदात्री के मंत्र

वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।कमलस्थितां चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्वनीम्॥सिद्धगंधर्वयक्षाद्यै:, असुरैरमरैरपि।सेव्यमाना सदा भूयात्, सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।इस मंत्र का अर्थ है कि, सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और स्वयं देवताओं के द्वारा पूजित और सिद्धि देने वाली माँ सिद्धिदात्री हमें भी आठ सिद्धियां प्रदान करें और अपना असीम आशीर्वाद हमारे जीवन पर बनाए रखें।
OCT 04, 2022 09:42 IST

आज के शुभ मुहूर्त (Today Shubh Muhurat)

4 अक्टूबर 2022 का शुभ मुहूर्तअभिजीत- 11:58am से 12:48pm तक।विजय मुहूर्त- 02:29pm से 03:28 pm तकगोधुली मुहूर्त- 06:19pm से 06:56pm तक
OCT 04, 2022 08:42 IST

मां सिद्धिदात्री पूजा मुहूर्त

नवरात्रि 9 वें दिन पूजा तिथि: 4 अक्टूबर, मंगलवारनवमी तिथि आरंभ - 3 अक्टूबर 2022 को 04:37 पी एम बजेनवमी तिथि समापन- 4 अक्टूबर 2022 को 02:20 पी एम बजे
OCT 04, 2022 08:16 IST

अत्यंत शुभमंगल और सभी प्रकार से कार्य सिद्ध करने वाला स्तोत्र

॥ अथार्गलास्तोत्रम् ॥ॐ अस्य श्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुर्ऋषिः,अनुष्टुप् छन्दः,श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रीजगदम्बाप्रीतयेसप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥ॐ नमश्‍चण्डिकायै॥ मार्कण्डेय उवाचॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥1॥ जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥2॥मधुकैटभविद्राविविधातृवरदे नमः।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥3॥ महिषासुरनिर्णाशि भक्तानां सुखदे नमः।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥4॥रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥5॥ शुम्भस्यैव निशुम्भस्य धूम्राक्षस्य च मर्दिनि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥6॥वन्दिताङ्‌घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥7॥ अचिन्त्यरुपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥8॥नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥9॥ स्तुवद्‌भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि१॥10॥चण्डिके सततं ये त्वामर्चयन्तीह भक्तितः।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥11॥ देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥12॥विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥13॥ विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥14॥सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥15॥ विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥16॥प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥17॥चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्‍वरि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥18॥कृष्णेन संस्तुते देवि शश्‍वद्भक्त्या सदाम्बिके।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥19॥हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्‍वरि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥20॥इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्‍वरि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥21॥देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पविनाशिनि।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥22॥देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके।रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥23॥पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥24॥इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः।स तु सप्तशतीसंख्यावरमाप्नोति सम्पदाम्॥25॥ ॥ इति देव्या अर्गलास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
OCT 04, 2022 07:52 IST

महा नवमी की कथा (Maha Navami Katha)

एक पौराणिक कथा के अनुसार जब पूरे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया था तब उस अंधकार में ऊर्जा की एक छोटी किरण प्रकट हुई। जैसे-जैसे समय बीत रहा था वैसे-वैसे ये किरण बड़ी होती गई और इसने एक पवित्र दिव्य नारी का रूप धारण कर लिया। ऐसा माना जाता है कि यही देवी भगवती का नौवां स्वरूप माँ सिद्धिदात्री के रूप में जाना गया।मान्यताओं अनुसार माँ सिद्धिदात्री ने प्रकट होकर त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु, और महेश को जन्म दिया था। साथ ही ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान शिव शंकर को जो आठ सिद्धियां प्राप्त थीं वो भी माँ सिद्धिदात्री की ही कृपा से प्राप्त हुई थी। इनकी ही कृपा से शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ जिससे महादेव अर्धनारेश्वर कहलाए।इसके अलावा ऐसा भी कहा जाता है कि जब सभी देवी देवता राक्षस महिषासुर के अत्याचार से परेशान हो गए थे तब तीनों देवों ने अपने तेज से माँ सिद्धिदात्री को जन्म दिया। जिन्होंने कई वर्षों तक महिषासुर के साथ युद्ध किया और अंत में महिषासुर का वध करके तीनों लोकों को उसके अत्याचार से मुक्ति दिलाई।
OCT 04, 2022 07:51 IST

महा नवमी पर करें ये महा उपाय

आज महा नवमी मनाई जा रही है। इस दिन लोग मां की विधि विधान पूजा करते हैं। हवन कर और कन्याओं को भोजन कराकर व्रत का पारण किया जाता है। मां के मंत्रों का जाप किया जाता है। इन सभी के अलावा कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिन्हें आप करके मां दुर्गा के साथ-साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त कर सकते हैं। महा नवमी के इन महा उपायों को जानने के लिए यहां क्लिक करें
OCT 04, 2022 07:29 IST

देवी भगवती का नौवां स्वरूप मां सिद्धिदात्री

मां सिद्धिदात्री से संबंधित पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है कि, जब पूरे ब्रह्मांड में अंधकार छा गया था तब उस अंधकार में ऊर्जा की एक छोटा सी किरण प्रकट हुई। धीरे-धीरे यह किरण बड़ी होती गई और इसने एक पवित्र दिव्य नारी का रूप धारण कर लिया। कहा जाता है यही देवी भगवती का नौवां स्वरूप माँ सिद्धिदात्री के रूप में परिणित हुआ।
OCT 04, 2022 07:09 IST

मां सिद्धिदात्री के कारण ही शिव जी कहलाए अर्धनारीश्वर

माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ही महादेव का आधा शरीर देवी का हो गया था और तब को अपने इस स्वरूप में अर्धनारीश्वर कहलाए थे। कहते हैं माँ सिद्धिदात्री की पूजा करने से व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है। उन्हें रोग, शोक, और भय से मुक्ति मिलती है।
OCT 04, 2022 06:54 IST

मां सिद्धिदात्री की आरती

जय सिद्धिदात्री तू सिद्धि की दातातू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता,तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धितेरे नाम से मन की होती है शुद्धि!!कठिन काम सिद्ध कराती हो तुमजब भी हाथ सेवक के सर धरती हो तुम,तेरी पूजा में तो न कोई विधि हैतू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है!!रविवार को तेरा सुमरिन करे जोतेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो,तुम सब काज उसके कराती हो पूरेकभी काम उसके रहे न अधूरे!!तुम्हारी दया और तुम्हारी यह मायारखे जिसके सर पर मैया अपनी छाया,सर्व सिद्धि दाती वो है भाग्यशालीजो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली!!हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरामहा नंदा मंदिर में है वास तेरा,मुझे आसरा है तुम्हारा ही मातावंदना है सवाली तू जिसकी दाता!!
OCT 04, 2022 06:36 IST

नवरात्रि के नौवें दिन कन्या पूजन:

नवरात्रि के नौवें दिन का कन्या पूजन किया जाता है।इस दिन अपने घर में छोटी कन्याओं को बुलाकर उन्हें स-सम्मान भोजन कराया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।फिर कन्याओं को दक्षिणा, उपहार आदि देकर विदा करते हैं।
OCT 04, 2022 06:15 IST

नवरात्रि के आखिरी दिन हवन क्यों है जरूरी?

नवरात्रि का समापन दरअसल हवन से ही होता है। कहते हैं कि नवरात्रि के आखिरी दिन यदि हवन ना किया जाए तो इससे माँ की साधना अधूरी रह जाती है। यही वजह है कि नवरात्रि के आखिरी दिन हवन करना बेहद जरूरी होता है। इतना ही नहीं हवन करने से ना केवल हमारे आसपास का वातावरण शुद्ध होता है बल्कि हमारे आसपास सकारात्मकता का संचार भी होता है।
OCT 04, 2022 05:49 IST

मां सिद्धिदात्री का मंत्र (Mata Mantra)

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
OCT 04, 2022 05:35 IST

महानवमी 2022 कन्या पूजा मुहूर्त (Maha Navami 2022 Kanya Pujan Muhurat)

04 अक्टूबर को महानवमी को पूरे दिन रवि योग बना है। इस दिन चौघड़िया मुहूर्त देखें तो सुबह 09:13 बजे से लेकर दोपहर 01:38 बजे तक शुभ समय है। इस समय में आप कन्या पूजन कर सकते हैं।चर-सामान्य 09:13 बजे से 10:41 बजे तकलाभ-उन्नति 10:41 बजे से 12:10 बजे तकअमृत-सर्वोत्तम 12:10 बजे से 01:38 बजे तक
OCT 04, 2022 00:10 IST

मां सिद्धिदात्री का भोग

मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री को नवमी पर इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं।
OCT 03, 2022 23:51 IST

मां सिद्धिदात्री आरती

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।तू जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है।रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।तू सब काज उसके करती है पूरे।कभी काम उसके रहे ना अधूरे।तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।जो है तेरे दर का ही अंबे सवाली।हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।
OCT 03, 2022 23:12 IST

नवरात्रि महा नवमी की पूजा-विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं। स्नान कराने के बाद पुष्प अर्पित करें।मां को रोली कुमकुम भी लगाएं। मां को मिष्ठान और पांच प्रकार के फलों का भोग लगाएं।मां स्कंदमाता का अधिक से अधिक ध्यान करें।मां की आरती अवश्य करें।
OCT 03, 2022 22:44 IST

नवमी के दिन बन रहे ये शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त- 04:38 ए एम से 05:27 ए एम।अभिजित मुहूर्त- 11:46 ए एम से 12:33 पी एम।विजय मुहूर्त- 02:08 पी एम से 02:55 पी एम।गोधूलि मुहूर्त- 05:52 पी एम से 06:16 पी एम।अमृत काल- 04:52 पी एम से 06:22 पी एम।रवि योग- पूरे दिन।
OCT 03, 2022 22:03 IST

मां दुर्गा को सुहाग का समान करें अर्पित

नवरात्रि की महानवमी के दिन मां दुर्गा को सुहाग का समान अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अखंड सौभाग्यवती होने का वरदान देती हैं।
OCT 03, 2022 21:30 IST

माता रानी के सामने जलाएं 9 दीपक

महानवमी के दिन एक शांत कमरे में उत्तर की दिशा की ओर मुंह करके एक पीले आसन पर बैठ जाएं। अब माता रानी की प्रतिमा के सामने 9 दीपक जलाएं। अब दीपकों के सामने लाल चावल की एक ढेरी बनाकर उस पर एक श्रीयंत्र रखें। पूजा के बाद इसे घर के मंदिर में स्थापित कर दें। ऐसा करने से आकस्मिक धन लाभ मिलता है।
OCT 03, 2022 20:50 IST

मां दुर्गा की कृपा से घर में आएगी संपन्नता

महानवमी के दिन मां दुर्गा को पीले रंग की कौड़ी और शंख चढ़ाएं। इस उपाय से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं। मां दुर्गा की कृपा से घर में संपन्नता आती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।