Magh Purnima Puja Samagri List (माघ पूर्णिमा की पूजा का सामान): हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। कहते हैं कि इस दिन भगवान भी धरती पर आते हैं। कई स्थानों पर इस दिन हवन और कथा का आयोजन भी किया जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई माघ पूर्णिमा की पूजा से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। अगर आपको भी माघ पूर्णिमा की पूजा करनी है तो सबसे पहले आज सामान की खरीदारी कर लेनी चाहिए। माघ पूर्णिमा की पूजा में क्या-क्या सामान लगता है, इसकी पूरी जानकारी हम यहां दे रहे हैं। साथ ही अगर आप हवन करना चाहते हैं तो उसके सामान की लिस्ट भी दी गई है।
माघ पूर्णिमा पूजा सामग्री लिस्ट-
- दीया
- घी या तिल का तेल
- अगरबत्ती
- धूप
- कपूर
- फूल
- अक्षत (कच्चे चावल)
- रोली या कुमकुम
- हल्दी
- नैवेद्य (खीर, फल, मिठाई, गुड़-तिल के लड्डू)
- नारियल
- पान के पत्ते
- गंगाजल या शुद्ध जल
- माला (जप के लिए)
- पूजा की किताब
- मंत्र पत्र
- लाल या पीला वस्त्र
- तुलसी दल
माघ पूर्णिमा स्नान-दान सामग्री लिस्ट-
- तिल
- वस्त्र
- अन्न
- दक्षिणा
माघ पूर्णिमा हवन सामग्री लिस्ट-
- हवन कुंड
- समिधा (आम / पीपल की लकड़ी)
- हवन सामग्री (जौ, तिल, चावल, गुग्गुल, लोबान आदि)
- घी
- कपूर
- सफेद तिल
- अक्षत
- सूखे फूल
- नारियल
- पंचामृत
- गंगाजल या शुद्ध जल
- दीया
- अगरबत्ती
- माचिस
- स्रुवा या लकड़ी का चम्मच
- आसन
- लाल या पीला वस्त्र
- हवन मंत्र पुस्तक
माघ पूर्णिमा की पूजा कैसे करें?
माघ पूर्णिमा के दिन सुबह-सुबह स्नान करें। अगर संभव हो तो नदी में या फिर घर पर ही स्नान कर साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थान को साफ कर दीया जलाएँ और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। फिर गंगाजल से पूजा स्थल का शुद्धिकरण करें। अब भगवान को फूल, अक्षत, रोली, हल्दी, तुलसी दल अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएं और नैवेद्य में खीर, फल या मिठाई अर्पित करें। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। अग संभव हो तो हवन करें और घी और तिल से आहुति दें। आखिर में आरती करें और प्रसाद ग्रहण करें। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इसलिए अन्न, वस्त्र या तिल का दान करें।
माघ पूर्णिमा हवन विधि-
माघ पूर्णिमा के दिन हवन विधि बहुत शुभ मानी जाती है। सबसे पहले साफ- सफाई कर पूजा स्थल को स्वच्छ करके, हवन कुंड की स्थापना करें। कुंड में अक्षत, गौमूत्र या जल से शुद्धि करें और अग्नि प्रज्वलित करें। फिर हवन सामग्री जैसे घी, गंध, कपूर, लकड़ी, सामग्रह, यज्ञोपवीत आदि तैयार रखें। हवन के दौरान गणेश जी की पूजा करके, भगवान विष्णु, सूर्य और अग्नि देव की नमस्कार करें। हवन मंत्रों का उच्चारण करते हुए घी और सामग्रह अग्नि में अर्पित करें। इस दौरान ऊं भूर्भुवः स्वः और गायत्री मंत्र का जाप करें। आखिर में हवन के बाद प्रसाद और पवित्र जल से सभी को आशीर्वाद दें और कुंड की राख को घर में सुरक्षित रखें।
