Magh Month 2026 Date (माघ मास कब से शुरू होगा ): हिंदू पंचांग के अनुसार माघ (Magha) हिंदू कैलेंडर का 11वां महीना होता है, जो शिशिर ऋतु (शीत ऋतु) के दौरान आता है। अंग्रेजी कैलेंडर में यह मास जनवरी-फरवरी के बीच में आता है। इसे हेमंत ऋतु से उत्तरायण की ओर जाने वाला समय भी माना जाता है। इसलिए इस माह में भगवान सूर्य को अर्घ्य देने, पवित्र नदियों में स्नान, पूजा-पाठ और दान-धर्म का विशेष महत्व है।
माघ मास कब से शुरू होगा 2026 में, देखें प्रमुख व्रत-त्योहार (Pic : Canva)
माघ मास 2026 कब से लगेगा
साल 2026 में माघ मास 4 जनवरी को रविवार के दिन से आरंभ होगा। इसका समापन एक फरवरी 2026 को रविवार पर होगा। पंचांग के अनुसार यह महीना पौष पूर्णिमा के अगली सुबह से शुरू होता है और माघ पूर्णिमा तक चलता है। पौष पूर्णिमा की तिथि तीन जनवरी 2026 की है तो अगली तारीख से माघ मास आरंभ हो जाएगा।
माघ महीने के त्यौहार 2026 में
- 04 जनवरी 2026, रविवार, माघ मास आरंभ
- 06 जनवरी 2026, मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी
- 14 जनवरी 2026, बुधवार, षटतिला एकादशी, मकर संक्रांति / उत्तरायण
- 16 जनवरी 2026, शुक्रवार, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि
- 18 जनवरी 2026, रविवार, माघ अमावस्या
- 23 जनवरी 2026, शुक्रवार, बसंत पंचमी / सरस्वती पूजा
- 29 जनवरी 2026, गुरुवार, जया एकादशी
- 30 जनवरी 2026, शुक्रवार, प्रदोष व्रत
- 01 फरवरी 2026, रविवार, माघ पूर्णिमा व्रत
माघ मेला 2026 में कब से लगेगा
माघ मेला पौष पूर्णिमा से लगता है और महाशिवरात्रि तक चलता है। यह मेला 3 जनवरी 2026 से शुरू होकर लगभग 15 फरवरी 2026 तक चलेगा।
माघ 2026 में स्नान की तिथियां
इस मेले में पवित्र नदी संगम (गंगा-यमुना-सरस्वती) में प्रमुख स्नान पर्व आते हैं, जैसे -
- 03 जनवरी 2026 - पौष पूर्णिमा (मेला तथा कल्पवास आरंभ)
- 14 जनवरी 2026 - मकर संक्रांति
- 18 जनवरी 2026 - मौनी अमावस्या
- 23 जनवरी 2026 - बसंत पंचमी
- 01 फरवरी 2026 - माघी पूर्णिमा
- 15 फरवरी 2026 - महाशिवरात्रि (मेला समापन)
माघ मास का महत्व
माघ मास में गंगा, यमुना और संगम में स्नान करने से पापों का नाश होता है। पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। इस समय दान-धर्म, तिल, वस्त्र, अन्न और दीपदान करने को भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस मास में प्रदोष व्रत, शिवरात्रि, मकर संक्रांति, अमावस्या, बसंत पंचमी और पूर्णिमा जैसे पर्व आते हैं जो भक्तों को धर्म, संस्कृति और अध्यात्म की ओर जोड़ते हैं।
