Gangajal Upay: जानें गंगाजल का हर शुभ और अशुभ कार्य में क्‍यों होता है उपयोग, क्‍या है नियम और महत्‍व

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 9, 2023, 12:33 PM IST

Gangajal Upay: हिन्‍दू धर्म में मान्यता है कि गंगा के पावन जल के स्नान मात्र से व्यक्ति के सभी पाप दूर हो जाते हैं। गंगा माता व्‍यक्ति को जीवन के पापो से मुक्ति दिला मोक्ष देती हैं। यही कारण है कि गंगाजल का उपयोग पूजा-पाठ से लेकर सभी शुभ और अशुभ कार्यों में किया जाता है।

KEY HIGHLIGHTS
  • गंगाजल को स्पर्श करके कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए
  • मां गंगा को माना जाता है मोक्षदायिनी
  • गंगाजल के बगैर पूजा-पाठ रहता है अधूरा

Gangajal Upay: भारत में गंगा नदी को सबसे पवित्र माना गया है। हिंदू धर्म में गंगाजल का प्रयोग सभी शुभ और अशुभ कार्यों में किया जाता है। यही कारण है कि यह पवित्र जल हर घर में मिल जाता है। धार्मिक मान्‍यता के अनुसार, कोई व्‍यक्ति कितना भी अपवित्र या पापी क्यों न हो, अगर वह गंगा में डूबकी लगा लें तो उसके पाप पूरी तरह से धुल जाते हैं। किसी भी तरह के पूजा-पाठ से लेकर शुद्धिकरण के लिए हमेशा सबसे पहले गंगाजल का ही उपयोग होता है। साथ ही इनकी पूजा भी की जाती है। जब किसी व्‍यक्ति की मृत्‍यु हो जाती है तो उसके मुख में भी गंगाजल डाला जाता है। ऐसा क्यों करते हैं आइए जानते हैं।

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जानें शुभ और अशुभ कार्यों में गंगाजल उपयोग का नियम और महत्व

गंगाजल से जुड़े जरूरी नियम

तन, मन और आत्मा को पवित्र करने वाले गंगाजल को हमेशा पवित्र स्‍थान पर ही रखना चाहिए। पूजा के समय गंगाजल को हमेशा कांसे या तांबे के बर्तन में भरकर रखना चाहिए। गंगाजल को कभी भी जूठे हाथों से या फिर जूते-चप्पल पहनकर न छुएं। गंगा जल को रखने का सबसे उत्‍तम जगह ईशान कोण यानि पूजा घर को माना जाता है। गंगाजल को स्पर्श करके कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए।

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