Kunj Bihari Aarti Lyrics in Hindi: फुलेरा दूज पर जरूर करें बांके बिहारी की आरती, यहां देखें आरती के हिन्दी में लिरिक्स

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Feb 21, 2023, 07:10 AM IST

Shri Krishna Aarti, Kunj Bihari Aarti: फुलेरा दूज के पावन अवसर पर जरूर करें भगवान कृष्ण की ये आरती। विवाहित जीवन में आ रही सभी अड़चन हो जाएंगी दूर।

Kunj Bihari Aarti Lyrics in Hindi 2023: फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाता है। राधा कृष्ण के भक्त इस दिन का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं। मान्यता है कि इस दिन राधा कृष्ण का विवाह भी हुआ था । यह दिन राधाकृष्ण के मंगल मिलन का माना जाता है। इस दिन बृज और वृंदावन में फूलों की होली खेली जाती है ।इस बार फुलेरा दूज 21 फरवरी मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन शुभ मुहूर्त में राधा कृष्ण की पूजा की जाती है। वैवाहिक जीवन और प्रेम संबंध में मधुरता लाने के लिए यह दिन बहुत शुभ होता है। इस दिन राधा कृष्ण की पूजा करनी चाहिए । साथ ही इस दिन विवाह आदि मांगलिक कार्य भी किए जाते हैं। पूजा में बांके बिहारी की आरती जरूर करनी चाहिए ।यहां देखें बांके बिहारी की आरती हिंदी में...

Aarti Kunj Bihari Ki KRISHNA AARTI

Krishna Aarti: आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की

आरती कुंजबिहारी की (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics In Hindi)

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

गले में बैजंती माला,

बजावै मुरली मधुर बाला ।

श्रवण में कुण्डल झलकाला,

नंद के आनंद नंदलाला ।

गगन सम अंग कांति काली,

राधिका चमक रही आली ।

लतन में ठाढ़े बनमाली

भ्रमर सी अलक,

कस्तूरी तिलक,

चंद्र सी झलक,

ललित छवि श्यामा प्यारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,

देवता दरसन को तरसैं ।

गगन सों सुमन रासि बरसै ।

बजे मुरचंग,

मधुर मिरदंग,

ग्वालिन संग,

अतुल रति गोप कुमारी की,

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,

सकल मन हारिणि श्री गंगा ।

स्मरन ते होत मोह भंगा

बसी शिव सीस,

जटा के बीच,

हरै अघ कीच,

चरन छवि श्रीबनवारी की,

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,

बज रही वृंदावन बेनू ।

चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू

हंसत मृदु मंद,

चांदनी चंद,

कटत भव फंद,

टेर सुन दीन दुखारी की,

श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

॥ आरती कुंजबिहारी की...॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,

श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

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