Kawad Jal Date 2026: सावन का महीना आते ही माहौल बदलने लगता है। सड़कों पर भगवा कपड़ों में 'बोल बम' के जयकारे लगाते कांवड़िये दिखाई देने लगते हैं। कोई पैदल चल रहा होता है, कोई डाक कांवड़ लेकर दौड़ रहा होता है तो कोई परिवार और दोस्तों के साथ कई दिनों की यात्रा पर निकल पड़ता है। इस पूरी यात्रा का सबसे खास पल वह होता है, जब गंगाजल भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।
2026 में कांवड़ का जल कब चढ़ेगा
अगर आप भी 2026 में कांवड़ यात्रा करने की तैयारी कर रहे हैं या सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि कांवड़ का जल कब चढ़ाया जाएगा, तो पहले पूरी तारीख और उससे जुड़ी जरूरी बातें जान लेना बेहतर रहेगा।
2026 में कांवड़ का जल कब चढ़ेगा
साल 2026 में कांवड़ का जल 11 अगस्त, मंगलवार को चढ़ाया जाएगा। इसी दिन सावन शिवरात्रि भी है। यही वजह है कि अधिकांश कांवड़िये अपनी यात्रा इस तरह तय करते हैं कि शिवरात्रि के दिन अपने शिव मंदिर पहुंचकर गंगाजल से जलाभिषेक कर सकें।
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कारण हर साल लाखों श्रद्धालु कई दिनों की कठिन यात्रा पूरी करके इसी दिन जल चढ़ाने का संकल्प लेते हैं।
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कांवड़ जल कब चढ़ाते हैं सावन में
कांवड़ जल को सावन शिवरात्रि की तिथि पर चढ़ाया जाता है। 2026 में सावन शिवरात्रि को 11 अगस्त की तारीख पर मंगलवार को मनाया जाएगा। सावन की यह शिवरात्रि पूरे साल आने वाली शिवरात्रियों में सबसे विशेष मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया जलाभिषेक और पूजा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होती है।
यही कारण है कि कांवड़ यात्रा का समापन भी इसी दिन जल चढ़ाकर किया जाता है। कई मंदिरों में इस अवसर पर पूरी रात भजन, कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना होती है।
2026 में सावन कब से शुरू होगा
पंचांग के अनुसार, 2026 में सावन का महीना 30 जुलाई को गुरुवार से शुरू होगा। इसी के साथ कांवड़ यात्रा भी अपने चरम पर पहुंचने लगती है। हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज जैसे तीर्थों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगती है और हाईवे से लेकर गांवों तक हर तरफ 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' की गूंज सुनाई देती है।
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सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान कई लोग सोमवार का व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक कराते हैं और रोजाना शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं।
2026 में सावन कब समाप्त होगा
साल 2026 में सावन मास 28 अगस्त, शुक्रवार को समाप्त होगा। हालांकि कांवड़ यात्रा की सबसे बड़ी रौनक सावन शिवरात्रि तक ही रहती है, लेकिन पूरे सावन महीने में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ बनी रहती है। सोमवार के व्रत, जलाभिषेक और शिव पूजा का सिलसिला महीने के आखिरी दिन तक चलता रहता है।
कांवड़ का जल कैसे चढ़ाया जाता है
कांवड़ में लाया गया गंगाजल बेहद पवित्र माना जाता है, इसलिए इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ चढ़ाया जाता है। मंदिर पहुंचने के बाद पहले स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए धीरे-धीरे गंगाजल शिवलिंग पर अर्पित करें।
जलाभिषेक के बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, सफेद पुष्प और मौसमी फल चढ़ाए जा सकते हैं। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। अंत में शिव आरती करके परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
