Karwa Chauth Chandra Puja Vidhi: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था, प्रेम और समर्पण का पर्व है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को करवा माता और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। हालांकि, इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा है। मान्यता है कि चंद्रदेव की पूजा और अर्घ्य अर्पित करने के बाद ही करवा चौथ का व्रत पूर्ण किया जाता है। जानें करवाचौथ (Karwa Chauth 2026) में चंद्रमा के पूजन और अर्घ्य की संपूर्ण विधि।
करवा चौथ पर चंद्र पूजन की विधि (Photo - AI)
करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा क्यों की जाती है?
हिंदू धर्म में चंद्रमा को शीतलता, मन और सौम्यता का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रदेव की पूजा करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन करना और उन्हें अर्घ्य देना व्रत की प्रमुख परंपराओं में शामिल है। इस दिन महिलाएं चंद्रदेव से अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं। आजकल चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है।
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करवा चौथ पर चंद्र पूजन की सामग्री
चंद्रदेव की पूजा के लिए सामग्री पहले से तैयार कर लेना अच्छा रहता है, ताकि चंद्रोदय के समय किसी चीज की कमी न हो।
- पूजा के लिए जल से भरा लोटा या करवा
- दूध और अक्षत (साबुत चावल)
- रोली या कुमकुम
- फूल और मिठाई
- दीपक और घी
- छलनी और पूजा की थाली
- आसन और साफ कपड़ा
करवा चौथ पर चंद्रमा के पूजन की संपूर्ण विधि
1. चंद्रोदय से पहले पूजा की तैयारी करें
शाम के समय स्नान या हाथ-पैर साफ करके पूजा के लिए तैयार हो जाएं। पूजा की थाली में दीपक, रोली, अक्षत, फूल, मिठाई और अर्घ्य देने के लिए जल से भरा पात्र रखें। इसके बाद चंद्रमा के उदय होने की प्रतीक्षा करें।
2. चंद्रमा के दर्शन करके प्रणाम करें
चंद्रोदय होने पर खुले स्थान से चंद्रदेव के दर्शन करें। हाथ जोड़कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना करें। इसके बाद चंद्रदेव को रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। कुछ परिवारों में चंद्रमा को देखकर दीपक जलाने और पारंपरिक पूजा मंत्रों का जाप करने की भी परंपरा है।
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3. चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करें
करवा चौथ की पूजा में अर्घ्य देने का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए जल से भरा लोटा या करवा दोनों हाथों से पकड़ें और चंद्रमा की ओर मुख करके धीरे-धीरे जल अर्पित करें। परिवार की परंपरा के अनुसार जल में थोड़ा दूध और अक्षत भी मिलाए जा सकते हैं। अर्घ्य अर्पित करते हुए चंद्रदेव से सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना करें।
4. चंद्रमा की आरती करें और प्रार्थना करें
अर्घ्य देने के बाद चंद्रदेव को प्रणाम करें। चाहें तो चंद्रदेव की आरती करें या अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए प्रार्थना करें। इस दौरान मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव बनाए रखें। पूजा के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पति की आरती या तिलक करने की रस्म भी निभाई जा सकती है।
5. छलनी से चंद्रमा और पति के दर्शन करें
करवा चौथ पर छलनी से चंद्रमा को देखने की परंपरा काफी लोकप्रिय है। कई महिलाएं पहले छलनी से चंद्रमा के दर्शन करती हैं और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद पति पत्नी को जल पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। हालांकि, यह रस्म सभी क्षेत्रों और परिवारों में एक जैसी नहीं होती है।
करवा चौथ पर चंद्र पूजन का शुभ समय क्या है?
करवा चौथ पर चंद्रमा की पूजा का समय स्थानीय चंद्रोदय पर निर्भर करता है। पंचांग के अनुसार, साल 2026 में करवा चौथ 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जा रहा है। आज दिल्ली-एनसीआर में चंद्रोदय का समय लगभग रात 8:17 बजे रहेगा। हालांकि चंद्रोदय के समय का अंतिम फैसला स्थानीय पंचांग देखकर ही लेना चाहिए।
