Shani Pradosh Vrat Katha 2025 (शनि प्रदोष व्रत कथा): आज कार्तिक मास का प्रदोष व्रत है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। आज के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहले से प्रारंभ होकर 45 मिनट बाद तक रहता है। इस दौरान ही पूजा का विधान है। प्रदोष की पूजा व्रत कथा के बिना अधूरी मानी जाती है। यहां से आप प्रदोष व्रत की कथा पढ़ सकते हैं और इसका पाठ कर सुख-शांति, समृद्धि का आशीर्वाद पा सकते हैं।
Kartik Pradosh Vrat Katha (कार्तिक प्रदोष व्रत कथा)
शनि प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक नगर में सेठ जी रहते थे। उनके घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन उन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई थी जिस वजह से वे परेशान रहते थे। एक समय काफी सोच-विचार के बाद सेठजी अपना सारा काम नौकरों को सौंपकर अपनी पत्नी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े। जब वह अपने नगर से बाहर निकले तो उन्हें एक साधु मिले, जो ध्यानमग्न बैठे हुए थे। सेठ और सेठानी आशीर्वाद पाने की इच्छा से साधु के पास जाकर बैठ गए। साधु ने जब आंखें खोलीं तो उन्हें ज्ञात हुआ कि वे दोनों उनके समक्ष काफी समय से आशीर्वाद लेने की प्रतीक्षा में बैठे हैं।
साधु ने कहा कि मैं तुम्हारा दुःख जानता हूं। तुम इस दुख के निवारण के लिए शनि प्रदोष व्रत करो, इससे तुम्हें संतान सुख प्राप्त अवश्य होगा। फिर साधु ने सेठ-सेठानी को प्रदोष व्रत की विधि बताई और साथ ही शंकर भगवान की निम्न वंदना बताई।
सेठ-सेठानी साधु से आशीर्वाद लेकर तीर्थयात्रा के लिए चल पड़े। तीर्थयात्रा से लौटने के बाद दोनों ने मिलकर शनि प्रदोष व्रत किया और इस व्रत के प्रभाव से उनके घर एक सुंदर पुत्र का जन्म हुआ और उनका जीवन खुशियों से भर गया।
