Shani Pradosh Vrat Katha: धनतेरस पर शनि प्रदोष व्रत, यहां पढ़ें प्रदोष व्रत की कथा और कहानी हिंदी में लिखित

Shani Pradosh Vrat Katha 2025 (शनि प्रदोष व्रत कथा): आज धनतेरस तो है और साथ ही कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का शनि प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव की पूरे विधि-विधान से पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने से जीवन में सुख-शांति आती है और सफलता के रास्ते में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं। यहां से आप शनि प्रदोष व्रत कथा पढ़ सकते हैं।

Shani Pradosh Vrat Katha 2025 (शनि प्रदोष व्रत कथा): आज कार्तिक मास का प्रदोष व्रत है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहते हैं। आज के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहले से प्रारंभ होकर 45 मिनट बाद तक रहता है। इस दौरान ही पूजा का विधान है। प्रदोष की पूजा व्रत कथा के बिना अधूरी मानी जाती है। यहां से आप प्रदोष व्रत की कथा पढ़ सकते हैं और इसका पाठ कर सुख-शांति, समृद्धि का आशीर्वाद पा सकते हैं।

कार्तिक शनि प्रदोष व्रत कथा (pic credit: canva)

Kartik Pradosh Vrat Katha (कार्तिक प्रदोष व्रत कथा)

शनि प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक नगर में सेठ जी रहते थे। उनके घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन उन्हें संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई थी जिस वजह से वे परेशान रहते थे। एक समय काफी सोच-विचार के बाद सेठजी अपना सारा काम नौकरों को सौंपकर अपनी पत्नी के साथ तीर्थयात्रा पर निकल पड़े। जब वह अपने नगर से बाहर निकले तो उन्हें एक साधु मिले, जो ध्यानमग्न बैठे हुए थे। सेठ और सेठानी आशीर्वाद पाने की इच्छा से साधु के पास जाकर बैठ गए। साधु ने जब आंखें खोलीं तो उन्हें ज्ञात हुआ कि वे दोनों उनके समक्ष काफी समय से आशीर्वाद लेने की प्रतीक्षा में बैठे हैं।

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