Jyeshtha Purnima 2025 Puja Vidhi, Shubh Muhurat: इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 10 जून को रखा जाएगा। इस दिन गंगा स्नान करना बेहद पुण्य का काम माना जाता है। कहते हैं इससे मनुष्य के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही ये दिन दान इत्यादि कार्यों के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा ये पूर्णिमा तिथि व्रत-उपवास के लिए भी बेहद उत्तम मानी जाती है और कई स्थानों पर इस दिन महिलाएं वट सावित्री व्रत भी रखती हैं। कहते हैं इस दिन व्रत रखने से जीवन में सुख-शांति आती है। चलिए जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजा विधि और मुहूर्त।
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 तिथि व मुहूर्त (Jyeshtha Purnima 2025 Date And Time)
ज्येष्ठ पूर्णिमा- 10 जून 2025, मंगलवार
पूर्णिमा उपवास के दिन चन्द्रोदय - 06:45 PM
उदय व्यापिनी ज्येष्ठ पूर्णिमा- 11 जून 2025, बुधवार
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ- 10 जून 2025 को 11:35 AM
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 11 जून 2025 को 01:13 PM
ज्येष्ठ पूर्णिमा की पूजा विधि (Jyeshtha Purnima Puja Vidhi)
- प्रातःकाल स्नान कर पवित्र वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- घर या मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- तांबे या पीतल के कलश में जल, अक्षत, पुष्प, तिल और तुलसी डालकर अर्पित करें।
- भगवान विष्णु को पीले पुष्प, तुलसीदल, और पीतांबर अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम, गंगा स्तोत्र, या विष्णु चालीसा का पाठ करें।
- जरूरतमंदों को जल, शर्बत, तिल, वस्त्र और अन्न का दान करें।
- दिनभर सात्विक भोजन ग्रहण करें या उपवास रखकर फलाहार करें।
ज्येष्ठ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व (Jyeshtha Purnima Ka Dharmik Mahatva)
धार्मिक मान्यताओं अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान और दान करने से पापों का क्षय होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन देवताओं को जल अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025
पूर्णिमा तिथि: 10 जून सुबह 11:35 बजे से 11 जून दोपहर 1:13 बजे तक.
व्रत: 10 जून को रखा जाएगा
पूजा विधि: प्रातःकाल स्नान, पवित्र वस्त्र धारण, व्रत का संकल्प, भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, तांबे या पीतल के कलश में जल, अक्षत, पुष्प, तिल और तुलसी अर्पित करना.
दान: जरूरतमंदों को जल, शर्बत, तिल, वस्त्र और अन्न का दान.
उपवास: दिनभर सात्विक भोजन या फलाहार
महत्व: सुख, समृद्धि और मन की शुद्धता के लिए ईश्वर से आशीर्वाद प्राप्त करना
अनुष्ठान: भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, विष्णु सहस्रनाम, गंगा स्तोत्र, या विष्णु चालीसा का पाठ
वट सावित्री व्रत: कुछ स्थानों पर यह व्रत वट सावित्री व्रत के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें वट वृक्ष की पूजा की जाती है
व्रत के नियम: संयम, उपवास, पूजा और आराधना, सात्विक भोजन.
शुभ मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त, विजय मुहूर्त, गोधुली मुहूर्त, अमृत काल, संध्या पूजन
