Jivitputrika Vrat Ki Aarti: आज 3 अक्टूबर 2026 को जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जा रहा है। संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए रखा जाने वाला यह व्रत धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। व्रत में पूजा-पाठ और कथा के बाद आरती करने की परंपरा है। बिना आरती के व्रत का पूजन अधूरा माना जाता है। जितिया व्रत में महिलाएं संतान की सलामती और लंबी उम्र की कामना के साथ व्रत रखती हैं। पूजा के बाद आरती अवश्य की जाती है।
जितिया व्रत की आरती (Image AI Generated and Newsroom Verified)
जितिया व्रत की आरती लिरिक्स हिंदी में (Jitiya Vrat Par Suryadev Ki Arti)
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप...
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दुःखहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप...
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप...
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप...
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप...
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप...
जितिया माता की आरती (Jitiya Mata Ki Arti)
जय जय जय जितिया महारानी।
तुम हो जग की पालनहारी, हरती हो सबकी परेशानी॥
जय जय जय जितिया महारानी...
तुम्हारे व्रत से संतानें, सुखी रहें और दीर्घायु पाएं।
सुख-समृद्धि से भरे रहें घर, माताएं मनवांछित फल पाएं॥
जय जय जय जितिया महारानी...
जो नारी श्रद्धा से पूजे, महिमा तुम्हारी अपरम्पार।
संकट हर लो संतान के सारे, कर दो जीवन सुखमय अपार॥
जय जय जय जितिया महारानी...
जीमूतवाहन की महिमा से, जुड़ी हुई है कथा तुम्हारी।
त्याग, दया और धर्म की देवी, तुम हो जग की पालनहारी॥
जय जय जय जितिया महारानी...
शंखचूड़ के प्राण बचाए, जीमूतवाहन ने त्याग दिखाया।
गरुड़ देव ने दिया वरदान, धर्म का जग में मान बढ़ाया॥
जय जय जय जितिया महारानी...
माता अपने लाल की खातिर, रखती हैं यह कठिन उपवास।
तुमसे मांगें सुख और रक्षा, पूर्ण करो माता हर आस॥
जय जय जय जितिया महारानी...
दुःख हरने वाली माता, तुम जीवन की ज्योति जगाती।
जिस घर में हो कृपा तुम्हारी, वहां खुशियों की धारा आती॥
जय जय जय जितिया महारानी...
संतान रहे सदा सुखी, निरोगी और दीर्घायु हो।
माता के मन की हर इच्छा, जितिया माता पूरी हो॥
जय जय जय जितिया महारानी।
तुम हो जग की पालनहारी, हरती हो सबकी परेशानी॥
जय जय जय जितिया महारानी...
जितिया व्रत का मंत्र
जितिया व्रत की पूजा के दौरान दिए गए पाठ के अनुसार यह मंत्र पढ़ा जाता है।
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
इस मंत्र का जाप पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ किया जाता है। इसके बाद आरती करके पूजा का समापन किया जाता है।
जितिया की आरती कब करें
जितिया व्रत की आरती सुबह और शाम की जा सकती है। हालांकि, प्रदोष काल की आरती को विशेष महत्व दिया गया है। शाम की पूजा में दीप जलाकर पहले भगवान का स्मरण करें। इसके बाद जितिया व्रत की कथा का पाठ या श्रवण करें और कथा के बाद आरती करें।
जितिया व्रत में आरती क्यों है जरूरी
धार्मिक पूजा में आरती को पूजा के समापन चरण के रूप में किया जाता है। दीप-ज्योति के साथ आरती गाते हुए भगवान का स्मरण और स्तुति की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के बाद आरती में शामिल होकर संतान के सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं।
