Jivitputrika Vrat Ki Aarti, Jitiya Vrat Puja Aarti Lyrics in Hindi, Aarti Jimutvahan Ji Ki Lyrics Likhit Main: जितिया व्रत सुहागिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। ये तीन दिन का त्योहार होता है जिसकी शुरुआत आश्विन कृष्ण पक्ष की सप्तमी से होती है और समापन नवमी तिथि पर होता है। इस दौरान महिलाएं 24 घंटों का निर्जला व्रत रखती हैं और शाम में शुभ मुहूर्त में जितिया की पूजा करती हैं। इस पूजा के समय विशेष तरह की आरती की जाती है। जिसके बिना ये पूजा अधूरी मानी जाती है। चलिए जानते हैं जितिया की आरती के लिरिक्स।
जितिया व्रत कथा, जीमूतवाहन की पौराणिक कहानी के बिना अधूरा है जितिया का व्रत
जितिया की आरती pdf (Jitiya Ki Aarti)
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप..
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप..
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप..
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप..
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप..
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप..
जितिया व्रत का मंत्र (Jitiya Vrat Mantra)
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
जितिया आरती समय (Jitiya Aarti Time)
जितिया की आरती सुबह और शाम की जाती है। जिसमें प्रदोष काल की आरती सबसे जरूरी होती है। ये आरती जितिया की कथा के बाद की जाती है।
