बिना लोहे की कील के भी अडिग रहता है भगवान जगन्नाथ का विशाल रथ, जानें क्या है बनाने का सदियों पुराना तरीका

Jagannath Rath Yatra 2026: ओडिशा की पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा की चर्चा दुनिया भर में होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना लोहे की कील के इस्तेमाल के कैसे होता है भगवान जगन्नाथ के रथ का निर्माण? आइए विस्तार से समझते हैं इस सदियों पुरानी इस निर्माण प्रक्रिया के बारे में...

Jagannath Rath Yatra 2026: हर साल ओडिशा के पुरी में निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा दुनिया के सबसे भव्य धार्मिक आयोजनों में शामिल है। इस यात्रा के लाखों श्रद्धालु साक्षी बनने के लिए पुरी पहुंचते हैं। लेकिन इस भव्य उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण केवल भगवान के दर्शन नहीं, बल्कि वे तीन विशाल रथ भी हैं जो हर साल नए सिरे से तैयार किए जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि इन विशाल रथों के निर्माण में एक भी लोहे की कील का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। जी हां बिना एक भी कील के इस्तेमाल के कैसे ये विशाल रथ अपना दिव्य और भव्य रूप ले लेते हैं। आइए जानते हैं इन रथों के निर्माण (Jagannath Rath Construction) की सदियों पुरानी तकनीक के बारे में विस्तार से...

Jagannath Rath Yatra 2026

कैसे बनाए जाते हैं भगवान जगन्नाथ के रथ

आज भी है जीवंत है 900 साल पुरानी परंपरा

जगन्नाथ रथयात्रा से जुड़ी रथ निर्माण की ये परंपरा लगभग बीते 900 सालों से चली आ रही है। हर साल रथों का निर्माण नए सिरे से किया जाता है और पुराने रथों का उपयोग दोबारा नहीं किया जाता है। रथ निर्माण के कार्य की शुरुआत अक्षय तृतीया के शुभ दिन से होती है। इन रथों के निर्माण का कार्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी संभालने वाले महाराणा समुदाय के कारीगर पूरी श्रद्धा और पारंपरिक नियमों के अनुसार रथ निर्माण का कार्य करते हैं।

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