Indira Ekadashi Vrat Katha In Hindi : इन्दिरा एकादशी की व्रत कथा, यहां पढ़ें आज की एकादशी की व्रत कथा, जानें इसकी पौराणिक कहानी

Indira Ekadashi Ki Vrat Katha (Ekadashi Vrat Katha Today In Hindi): आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इन्दिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। आज यानी 17 सितंबर 2025 को बुधवार के दिन इंदिरा एकादशी का व्रत है। देखें इन्दिरा एकादशी व्रत की कथा और जानें इस व्रत के पीछे की पौराणिक कहानी। यहां पढ़ें आज की एकादशी की व्रत कथा हिंदी में लिखित।

Indira Ekadashi Ki Vrat Katha (Ekadashi Vrat Katha Today In Hindi): : हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इन्दिरा एकादशी के तौर पर मनाया जाता है। पितृपक्ष में आने वाली ये एकादशी काफी खास है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने और भगवान विष्णु की आराधना करने से पितरों की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है और व्रत करने वाले व्यक्ति के जीवन से दुख दूर होते हैं। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन से बड़े-बड़े पापों का नाश होता है, और वह सुखी और संपन्न होता है। वहीं नीच योनी में पड़े आपके पितरों को भी यह व्रत सद्गति देने वाला है। आइए जानते हैं इन्दिरा एकादशी व्रत की कथा और पौराणिक कहानी। देखें आज की एकादशी की व्रत कथा।

Indira ekadashi ki vrat katha

इन्दिरा एकादशी की पौराणिक कथा - Indira Ekadashi Vrat Katha In Hindi

पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में इंद्रप्रस्थ नगरी में एक धर्मात्मा राजा रहते थे। उनका नाम इंद्रसेन था। वे बड़े ही दानशील और विष्णु भक्त थे। राजा अपनी प्रजा का लालन-पालन एकदम अपनी संतान की तरह करते थे। उनके राज्य में किसी भी तरह का कोई अभाव नहीं था। एक दिन राजा जब अपने राज्य में न्याय कर रहे थे, तभी नारद मुनि उनके दरबार में आए और बोले – “हे राजन, आपके पिता देहांत के उपरांत यमलोक में हैं और वहाँ वे दुःख भोग रहे हैं। राजा ने अपने पिता के दुखों का कारण पूछा तो महर्षि नारद ने बताया कि, क्योंकि जीवन में उनसे अनजाने में कुछ पाप हो गए थे। उन्हें मुक्ति दिलाने का एकमात्र उपाय इन्दिरा एकादशी का व्रत करना है।”

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