Hartalika Teej: हरितालिका तीज में बालू के शिव-पार्वती की प्रतिमा क्यों बनाई जाती है? जानें इसके पीछे की मान्यता

Hartalika Teej: हरितालिका तीज पर बालू या मिट्टी से बनी शिव-पार्वती की प्रतिमा की पूजा की जाती है। यह श्रद्धा, संकल्प और भक्ति का प्रतीक है। आइए विस्तार से जानते हैं इस प्रतिमा के पूजा विधि...

Hartalika Teej: हरितालिका तीज केवल व्रत और श्रृंगार का पर्व नहीं, बल्कि माता पार्वती के अटूट संकल्प, तपस्या और भगवान शिव को पति रूप में पाने की उनकी साधना की याद दिलाने वाला त्योहार भी है। इस दिन पूजा में बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा (Shiva Parvati Idol) बनाने की परंपरा कई क्षेत्रों में विशेष रूप से निभाई जाती है। आखिर इस परंपरा के पीछे क्या कहानी है और क्यों इसे इतना महत्वपूर्ण माना जाता है? आइए जानते हैं।

Hartalika Teej

हरितालिका तीज (Photo - Pinterest)

माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है कहानी

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती बचपन से ही भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने की इच्छा रखती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की। मान्यता है कि तपस्या के दौरान उन्होंने अपने हाथों से मिट्टी या बालू से शिवलिंग और शिव स्वरूप तैयार किया और पूरी श्रद्धा के साथ उनकी आराधना की। उनकी इसी अटूट भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वर दिया। यही वजह है कि हरितालिका तीज पर बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा को माता पार्वती की उस साधना की स्मृति से जोड़ा जाता है।

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