Hanuman Real Name: 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। भगवान हनुमान बल और ज्ञान के सागर हैं। दुनिया में उनके जैसा महावीर कोई दूसरा नहीं है। भगवान हनुमान बेहद ही विनम्र और करुणा के सागर हैं। अधिकतर लोग उनको बजरंगबली, हनुमान, केसरीनंदन आदि नामों से जानते हैं, लेकिन लोग उनके असली नाम को बहुत ही कम जानते हैं। आइए जानते हैं कि भगवान हनुमान का असली नाम क्या है?
क्या है हनुमान जी का असली नाम
हनुमान जी का असली नाम क्या है (Hanuman ji ka asli naam kya tha)
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान हनुमान का बचपन का नाम 'मारुति' था। उन्हें 'हनुमान' नाम बाद में मिला। मान्यता के अनुसार बचपन में उन्होंने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था, जिससे पूरी दुनिया में अंधेरा हो गया था। इस पर इंद्र ने उनसे युद्ध किया, लेकिन बचपन में भी हनुमान जी ने इंद्र को ऐरावत समेत हवा में उड़ा दिया। इससे क्रोधित होकर इंद्र देव ने उनपर वज्र से प्रहार किया, जिससे उनकी ठोड़ी यानी 'हनु' पर चोट लग गई। इसी कारण उनका नाम हनुमान पड़ा, जिसका अर्थ होता है 'जिसकी हनु (ठोड़ी) पर आघात हुआ हो।'
मारुति का क्या अर्थ होता है (Maruti ka matlab kya hai)
'मारुति' शब्द संस्कृत के 'मारुत' से बना है, जिसका अर्थ होता है वायु या हवा। इस कारण 'मारुति' का अर्थ हुआ 'वायु का पुत्र।' यही कारण है कि भगवान हनुमान को पवनसुत, वायुपुत्र और मारुतिनंदन जैसे नामों से भी जाना जाता है। दरअसल वायुदेव ने ही माता अंजना का पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था।
कैसे हुआ भगवान हनुमान का जन्म (Hanuman ji ke janm ki katha)
हनुमान जी के जन्म की कथा बेहद रोचक और दिव्य मानी जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, माता अंजना एक अप्सरा थीं, जिन्हें श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ा। उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की और उनसे पुत्र प्राप्ति का वरदान मांगा। इसके साथ ही उन्होंने भगवान शिव से कहा कि उनका पुत्र शिव की तरह ही हो। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अपने 11वें रुद्रावतार के रूप में जन्म लेने का वचन दिया। वहीं, एक कथा के अनुसार, भगवान राम के जन्म के समय जो दिव्य प्रसाद (पायसम) राजा दशरथ को मिला था, उसका एक अंश वायु देव के माध्यम से माता अंजना तक पहुंचा। उसी दिव्य अंश से हनुमान जी का जन्म हुआ।
इस प्रकार हनुमान जी को भगवान शिव का अंशावतार यानि 'रुद्रावतार' कहा जाता है। उनके जन्म में वायु देव की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण उन्हें 'पवनसुत' कहा जाता है, वहीं, अंजना के पति वानरराज केसरी थे, इस कारण हनुमान 'केसरीनंदन' कहलाए।
