Hanuman Ji 108 Naam: हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को कलयुग के देवता माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इनकी पूजा- अर्चना करने से साधक के सारे संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान जयंती के दिन वीर बजरंगी का जन्मदिन मनाया जाता है। इस दिन इनकी पूजा विधिवत करने से साधक को हर प्रकार के रोग और भय से मुक्ति मिल जाती है। इस साल हनुमान जयंती का पर्व 23 अप्रैल को मंगलवार के दिन मनाया जाएगा। शास्त्रों में मंगलवार का दिन हनुमान जी का माना जाता है। ऐसे में इस बार हनुमान जयंती के दिन पूजा का फल दौगुना मिलेगा। इस दिन पूजा में हनुमान जी के 108 नामों का जाप करें। यहां देखें भगवान हनुमान जी के 108 नाम की पूरी लिस्ट।
Hanuman Ji 108 Naam (हनुमान जी 108 नाम लिस्ट)
- विभीषणप्रियाय
- वज्रकायाय
- रामभक्ताय
- लंकापुरीविदाहक
- सुग्रीव सचिवाय
- पिंगलाक्षाय
- हरिमर्कटमर्कटाय
- रामकथालोलाय
- सीतान्वेणकर्त्ता
- भीमसेन सहायकृते
- कपीश्वराय
- महाकायाय
- कपिसेनानायक
- कुमार ब्रह्मचारिणे
- महाबलपराक्रमी
- रामदूताय
- अभयदाता
- केसरी सुताय
- शोक निवारणाय
- अंजनागर्भसंभूताय
- वज्रनखाय
- रुद्रवीर्य
- वायु पुत्र
- रामभक्त
- वानरेश्वर
- ब्रह्मचारी
- आंजनेय
- महावीर
- हनुमत
- मारुतात्मज
- तत्वज्ञानप्रदाता
- सीता मुद्राप्रदाता
- अशोकवह्रिकक्षेत्रे
- सर्वमायाविभंजन
- सर्वबन्धविमोत्र
- रक्षाविध्वंसकारी
- परविद्यापरिहारी
- परमशौर्यविनाशय
- परमंत्र निराकर्त्रे
- परयंत्र प्रभेदकाय
- सर्वग्रह निवासिने
- सर्वदु:खहराय
- सर्वलोकचारिणे
- मनोजवय
- पारिजातमूलस्थाय
- सर्वमूत्ररूपवते
- सर्वतंत्ररूपिणे
- सर्वयंत्रात्मकाय
- सर्वरोगहराय
- प्रभवे
- सर्वविद्यासम्पत
- भविष्य चतुरानन
- रत्नकुण्डल पाहक
- चंचलद्वाल
- गंधर्वविद्यात्त्वज्ञ
- कारागृहविमोक्त्री
- सर्वबंधमोचकाय
- सागरोत्तारकाय
- कालनाभाय
- कांचनाभाय
- पंचवक्त्राय
- महातपसी
- लंकिनीभंजन
- श्रीमते
- सिंहिकाप्राणहर्ता
- लोकपूज्याय
- धीराय
- शूराय
- प्रज्ञाय
- प्रतापवते
- बालार्कसदृशनाय
- दशग्रीवकुलान्तक
- लक्ष्मण प्राणदाता
- महाद्युतये
- चिरंजीवने
- दैत्यविघातक
- अक्षहन्त्रे
- दैत्यकुलान्तक
- सुरारर्चित
- महातेजस
- रामचूड़ामणिप्रदाय
- अंजली सुत
- मैनाकपूजिताय
- मार्तण्डमण्डलाय
- दृढ़व्रताय
- कालनेमि प्रमथनाय
- दान्ताय
- शान्ताय
- प्रसनात्मने
- शतकण्ठमदापहते
- केसरी नंदन
- अनघ
- अकाय
- तत्त्वगम्य
- लंकारि
- विनितेन्द्रिय
- रामसुग्रीव सन्धात्रे
- महारावण मर्दनाय
- स्फटिकाभाय
- वागधीक्षाय
- नवव्याकृतपंडित
- चतुर्बाहवे
- दीनबन्धवे
- महात्मने
- भक्तवत्सलाय
- अपराजित
- शुचये
- वाग्मिने
