गुंडिचा देवी की कहानी: कौन हैं भगवान जगन्नाथ की 'मौसी', जिनसे मिलने हर साल स्वयं निकल पड़ते हैं महाप्रभु

Gundicha Devi Kaun Hain (भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन सी देवी हैं ): पुरी रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ हर साल गुंडिचा मंदिर क्यों जाते हैं। जानिए गुंडिचा देवी कौन थीं, उन्हें भगवान की मौसी क्यों कहा जाता है और कहां है उनका मंदिर।

Gundicha Devi Kaun Hain (भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन सी देवी हैं ): पुरी की विश्वविख्यात रथयात्रा को देखने वाला लगभग हर श्रद्धालु एक सवाल जरूर पूछता है कि आखिर भगवान जगन्नाथ इस यात्रा में हर साल किसके घर जाते हैं? और गुंडिचा देवी कौन हैं, जिन्हें भगवान की 'मौसी' कहा जाता है। इस प्रश्न का उत्तर केवल एक कथा में नहीं मिलता। जगन्नाथ परंपरा में गुंडिचा देवी से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं लोककथाओं, मंदिर परंपराओं और धार्मिक विश्वासों ने मिलकर गुंडिचा देवी को भक्तों के हृदय में भगवान की स्नेहमयी मौसी का स्थान दिया है।

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गुंडिचा देवी को जगन्नाथ की मौसी क्यों कहा जाता है (AI Image)

कौन थीं गुंडिचा देवी

गुंडिचा देवी के बारे में सबसे लोकप्रिय कथा राजा इंद्रद्युम्न और उनकी धर्मपत्नी रानी गुंडिचा से जुड़ी है। मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने ही भगवान जगन्नाथ के भव्य मंदिर का निर्माण कराया और भगवान के विग्रहों की स्थापना करवाई। इस पूरे दिव्य कार्य में रानी गुंडिचा ने भी असाधारण तप, धैर्य और समर्पण दिखाया। कहा जाता है कि जब राजा ब्रह्मा जी को प्राण-प्रतिष्ठा के लिए आमंत्रित करने गए, तब रानी ने वर्षों तक भगवान की प्रतीक्षा और तपस्या की। उनका यह निष्काम प्रेम किसी मां की ममता से कम नहीं था।

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