Goga Navami 2024: गोगा नवमी के त्योहार का हिंदू धर्म में खास ही महत्व है। इस दिन गोगादेव जी की पूजा पूरे विधि- विधान के साथ की जाती है। ये पर्व हर वर्ष भादव मास की कृ्ष्ण पक्ष की नवमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल आज यानि 27 अगस्त को गोगा नवमी मनाई जा रही है। ये पर्व वाल्मिकी समाज के लोग द्वारा खासतौर पर मनाया जाता है। गोगा नवमी के पर्व पर हर साल राजस्थान के गोगामेढ़ी में मेला लगता है। यहां पर हजारों की संख्या में गोगा स्वामी के भक्त गोगादेव की पूजा करने के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि गोगादेव की सच्चे मन से पूजा करने से साधक को संतान सुख की प्राप्ति होती है। आइए जानें इस व्रत की विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में।
Goga Navami 2024 Shubh Muhurat (गोगा नवनी शुभ मुहूर्त 2024)
इस साल भाद्रपद महीने की नवमी तिथि की शुरुआत 27 अगस्त को सुबह 2 बजकर 20 मिनट पर हुई है। वहीं इस तिथि का समापन 28 अगस्त को रात को 1 बजकर 33 मिनट पर होगी। ऐसे में गोगा नवमी 27 अगस्त को मनाई जा रही है। आज के दिन 11 बजकर 52 मिनट से लेकर 12 बजकर 40 मिनट तक का मुहूर्त शुभ रहने वाला है।
Goga Navami Puja Vidhi (गोगा नवमी पूजा विधि)
- गोगा नवमी के दिन स्नान के बाद मंदिर में साफ चौकी पर गोगा जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- उसके बाद गोगा जी को चावल, रोली, वस्त्र आदि अर्पित करें।
- इस दिन गोगा स्वामी को खीर, चूरमा या गुलगुले का भोग लगाना शुभ होता है।
- गोगा नवमी पर घोडे़ को मसूर की दाल खिलाने की परंपरा है।
- पूजा के अंत में, भक्त गोगाजी कथा का पाठ करें और आरती करें।
- उसके बाद भोग लगाकर प्रसाद सब में बांटें।
- गोगा नवमी के अवसर पर उत्तर-पश्चिमी भारत के ग्रामीण इलाकों में व्यापक मेले का आयोजन भी किया जाता है।
Goga Navami Katha (गोगा नवमी कथा)
प्राचीन कथा के अनुसार गोगा जी की मां बाछल देवी एक भी संतान नहीं थी। संतान ना होने के कारण वो बहुत दुखी रहती थीं। एक दिन गोगामड़ी में गुरु गोरखनाथ अपनी तपस्या करने के लिए आए हुए थे। तब बाछल देवी गुरु गोरखनाथ जी के पास जाती हैं और उनसे अपने संतान ना होने की समस्या को बताती हैं। उनकी समस्या को सुनने के बाद गुरु गोरखनाथ उनकों एक फल खाने के लिए देते हैं और पुत्रवती होने का आशीर्वाद देते हुए कहते हैं कि तेरा पुत्र बहुत वीर होगा। वो सांपों को वश में करना सिद्ध और शिरोमिणि होगा। उस फल के खाने के बाद बाछल को नौ महीने के बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति होती हैं। उन्होंने उसका नाम गुग्गा रखा। जिस जिन गु्ग्गा का जन्म हुआ वो भाद्रपद महीने की नवमी तिथि ही थी। बाद गुग्गा को गोगा के नाम से जाना जानें लगा। इनके ऊपर गुरु गोरखनाथ का आशीर्वाद था। ये गुरु गोरखनाथ के परम शिष्य थे।गोगा नवमी का महत्व (Goga Navami Importance)
गोगा नवमी का पर्व बाल्मीकि समाज के द्वारा बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ये इनकी पूजा उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्य में खासतौर पर की जाती है। गोगा नवमी का व्रत रखने से महिलाओं के संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ नागों दोष से भी छुटकारा मिलता है। राजस्थान के गोगामेड़ी नामक गांव में गोगा नवमी के दिन बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है।
