Hindu Religion: हिंदू धर्म में मंदिर और विभिन्न पूजा स्थल पर जाने और विधि-विधान से पूजन करने की परंपरा है। ज्यादातर लोग रोजाना मंदिर में जाकर भगवान के सामने शीश नवाते हैं। ऐसा करने से जीवन में जहां सकारात्मकता और मन को शांति मिलती है। वहीं, जीवन में सफलता और सुख-समृद्धि आती है। ज्यादातर लोगों को लगता है कि, वे रोजाना मंदिर जाते हैं और भगवान की खूब पूजा-पाठ भी करते हैं, लेकिन तब भी उन पर भगवान जी की कृपा नहीं बरसती है। इसके पीछे कुछ खास कारण है। हमारे धार्मिक ग्रंथों और वास्तु शास्त्र में मंदिर जाने और वहां पर पूजा-पाठ करने के कुछ नियम बताए गए हैं। जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है। इसके बाद ही देवी-देवताओं की कृपा मिलती है। आइए जानते हैं कि मंदिर जाते समय किन बातों और नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
मंदिर में प्रवेश करते समय इन नियमों का रखें ध्यान, बरसेगी कृपा
पवित्रता का रखें ध्यान
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मंदिर जाते समय हमेशा पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए। तभी वहां की सकारात्मक ऊर्जा आप को मिल सकेगी। शरीर और कपड़ों को साफ-सुथरा रखने के अलावा मन को भी साफ रखना बेहद जरूरी है। अगर मन में छल-कपट, अहंकार जैसे बुरे विचार हैं तो आप चाहे जितनी बार मंदिर जाकर पूजा-पाठ कर लें आपको उसका फल कभी नहीं मिलेगा।
मंदिर में ऐसे करें प्रवेश
धार्मि मान्यताओं के अनुसार मंदिर में प्रवेश करने से पहले हमेशा सीढ़ियों को छूकर प्रणाम करें। इसके साथ घंटी को बजाते हुए भगवान का ध्यान करें और अपने मन में बसें सभी बुरे विचारों को मंदिर के बाहर ही छोड़कर साफ मन से आगे बढ़े। इस तरह से मंदिर में प्रवेश करना खुद को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने की भावना को दर्शाता है। जब आप अपने आप को पूरी तरह से भगवान की शरण में समर्पित कर देंगे तो आपकी हर प्रार्थना सुनी जाएगी और मनोकामना भी पूरी होंगी।
भगवान से मांगने से पहले धन्यवाद करें
भगवान से सिर्फ मांगने के लिए ही मंदिर न जाएं। अगर जाएं भी तो कुछ भी मांगने से पहले जो आपके पास है उसके लिए उनका धन्यवाद करें। इसके बाद आप जो भी उनसे चाहते हैं उसके लिए प्रार्थना करें। हमें ये हमेशा समझना चाहिए कि हमारे पास जो कुछ भी है यह उनकी ही देन है। इसलिए ईश्वर का आभार व्यक्त करना कभी न भूलें।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
