Gangaur Puja Vidhi (गणगौर पूजा विधि): गणगौर की पूजा एक बहुत ही सुंदर और श्रद्धा से भरी परंपरा है, जिसे खासकर महिलाएं पूरे मन से करती हैं। ये पूजा मां गौरी और भगवान शिव को समर्पित होती है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और घर की खुशहाली की कामना करती हैं। वहीं कुंवारी लड़कियां अच्छे जीवनसाथी के लिए इस दिन व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं सुबह नहाकर साफ या नए कपड़े पहनती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और मिट्टी या लकड़ी की बनी गौरी-शिव की मूर्तियों को सजाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजा में फूल, कुमकुम, हल्दी, पानी और मिठाई अर्पित की जाती है, साथ ही दीप जलाकर आरती की जाती है। कई जगह महिलाएं गणगौर के गीत भी गाती हैं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है। आखिर में, मूर्तियों का जुलूस निकालकर उनका विसर्जन किया जाता है। यहां से आप गणगौर पूजा की पूरी विधि जान सकते हैं।
गणगौर पूजा मंत्र-
-जय गौरी शंकर अर्धांगिनी यथा त्वं शंकर प्रिया।
तथा मां कुरु कल्याणी कान्त कान्ता सुदुर्लभाम्।।
गणगौर की पूजा कैसे करें?
- गणगौर व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद देवी गौरी और शिव जी का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें।
- मिट्टी से ईसर यानी शिवजी और पार्वती स्वरूप गौर की प्रतिमा बनाएं और उसकी विधि विधान स्थापना करें।
- गणगौर को सुंदर वस्त्र पहनाएं।
- फिर रोली, मोली, मेहंदी, हल्दी, काजल आदि चीजों से विधि विधान पूजा करें और गणगौर के गीत भी गाएं।
- फिर घर की दीवार पर या किसी पेपर पर सोलह-सोलह बिंदियां रोली, मेहंदी और काजल से लगाएं।
- इसके बाद एक थाली में जल, दूध, दही, हल्दी, कुमकुम घोलकर सुहाग जल तैयार कर लें।
- फिर दोनों हाथ में दूब लेकर सुहागजल पहले गणगौर पर छिड़कें। फिर अपने ऊपर भी इसका छिड़काव करें।
- फिर गणगौर को मीठे गुने या चूरमे का भोग लगाना है।
- पूजा के समय गणगौर की कथा भी जरूर सुनें।
- फिर शाम को शुभ मुहूर्त में गणगौर को पानी पिलाने की परंपरा निभाई जाती है।
- इसके बाद किसी पवित्र सरोवर या कुंड में गणगौर की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है।
गणगौर पूजा के भोग-
गणगौर पूजा में कई तरह के पारंपरिक भोग चढ़ाएं जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से गेहूं से बने प्रसाद जैसे - गुड़ की लापसी, घेवर, और हलवा आदि शामिल है। इसके अलावा, फल, मिठाई और सूखे मेवे भी चढ़ाए जाते हैं। वहीं, कुछ जगह में विशेष प्रकार के भोजन जैसे दाल बाटी चूरमा भी बनाए जाते हैं।
गणगौर व्रत पति से छिपाकर क्यों किया जाता है?
गणगौर से जुड़ी एक रोचक परंपरा यह भी है कि कुछ क्षेत्रों में महिलाएं यह व्रत अपने पति से छिपाकर रखती हैं। मान्यता है कि अगर व्रत का प्रदर्शन या दिखावा किया जाए तो उसका पूर्ण फल नहीं मिलता। इसलिए इसे गुप्त रूप से करने की परंपरा चली आ रही है, ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। इसके अलावा, एक लोककथा के अनुसार माता गौरी ने भी जब यह व्रत भगवान शिव के लिए रखा था तब शिवजी को भी नहीं बताया था, इसलिए महिलाएं पति से छिपाकर यह व्रत करती है। साथ ही गणगौर पूजा का प्रसाद भी पुरुषों को नहीं दिया जाता।
