Gangaur Puja Katha: गणगौर का त्योहार क्यों मनाया जाता है? जानिए महिलाएं पति से छिपाकर क्यों करती हैं ये पूजा, क्या है इसकी पौराणिक कथा

Gangaur Puja Katha (गणगौर पूजा कथा): इस साल गणगौर पूजा का त्योहार 31 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रहती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं इस पर्व की शुरुआत कैसे हुई? इसकी पौराणिक कथा क्या है? चलिए इस बारे में जानते हैं।

Gangaur Puja Katha (गणगौर पूजा कथा): गणगौर पूजा का त्योहार महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। कहते हैं जो महिला सच्चे मन से इस दिन व्रत रखकर शिव-पार्वती की विधि विधान पूजा करती है उसके सुहाग को लंबी आयु की प्राप्ति होती है। साथ ही उसके वैवाहिक जीवन में भी सदैव खुशियां बनी रहती हैं। ये पर्व मुख्य रूप से राजस्थान की महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस पर्व की कहानी भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी है। चलिए जानते हैं गणगौर की पौराणिक कथा जो व्रत रखने वाली महिलाओं को जरूर पढ़नी चाहिए।

Gangaur Puja Katha (गणगौर पूजा कथा)

गणगौर की पौराणिक कथा अनुसार, एक समय की बात है, भगवान शंकर, माता पार्वती और नारदजी के साथ भ्रमण हेतु चल दिए। वे चलते-चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गांव में जा पहुंचे। उनका आगमन सुनकर ग्राम की गरीब महिलाएं उनके स्वागत के लिए थालियों में हल्दी एवं अक्षत लेकर पूजन के लिए पहुंचीं। पार्वती जी ने निर्धन महिलाओं की श्रद्धा भाव को समझकर सारा सुहाग रस उन पर छिड़क दिया। इस तरह से गरीब महिलाएं अटल सुहाग प्राप्त कर लौटीं। इसके बाद धनी वर्ग की महिलाएं अनेक प्रकार के पकवान सोने-चांदी के थालो में सजाकर पहुंची।

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