Gangaur ke Geet Lyrics in Hindi (Gangaur 2026 Geet Marwadi, Rajasthani) गणगौर के गीत Pdf लिखित में : गणगौर का पर्व माता गौरी की भक्ति, प्रेम और आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस खास अवसर पर भक्त माता गौरी की पूजा करते हैं और पारंपरिक लोकगीतों व भजनों के जरिए अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। इन गीतों की मधुर धुनें न सिर्फ मन को सुकून देती हैं, बल्कि पूरे माहौल को भी भक्ति और उत्साह से भर देती हैं। कई जगहों पर महिलाएं और परिवार मिलकर सामूहिक रूप से इन लोकगीतों को गाते हैं, जिससे आपसी जुड़ाव और त्योहार की रौनक और बढ़ जाती है। इन गीतों में माता गौरी और भगवान शिव के पवित्र संबंध और आदर्श जीवन की झलक भी देखने को मिलती है। ऐसे में यहां दिए गए भजन आपके उत्सव को और भी खास बना देंगे।
गणगौर के गीत
गणगौर गीत लिरिक्स इन हिंदी
यहां कुछ भजनों का कलेक्शन हैं जिन्हें आप कीर्तन में गाकर उत्सव में चार चांद लगा सकते हैं।
गौर गौर गोमती गीत इन हिंदी
गौर गौर गोमती ईसर पूजे पार्वती,
पार्वती का आला-गीला गौर का सोना का टीका,
टीका दे टमका दे बाला रानी बरत करयो,
करता करता आस आयो वास आयो,
खेरे खांडे लाडू आयो लाडू ले बीरा ने दियो,
बीरो ले मने पाल दी पाल को मै बरत करयो,
सन मन सोला सात कचौला ईशर गौरा दोन्यू जोड़ा,
जोड़ ज्वारा गेंहू ग्यारा राण्या पूजे राज ने म्हे पूजा सुहाग नेपूजा सामग्री सेट,
राण्या को राज बढ़तो जाए म्हाको सुहाग बढ़तो जाय ,
कीड़ी- कीड़ी कीड़ी ले कीड़ी थारी जात है जात है गुजरात है ,
गुजरात्यां को पाणी दे दे थाम्बा ताणी,
ताणी में सिंघोड़ा बाड़ी में भिजोड़ा,
म्हारो भाई एम्ल्यो खेमल्यो सेमल्यो सिंघाड़ा ल्यो
लाडू ल्यो पेड़ा ल्यो सेव ल्यो सिघाड़ा ल्यो,
झर झरती जलेबी ल्यो हरी -हरी दूब ल्यो गणगौर पूज ल्यो,
पानी प्यान का गीत इन हिंदी
म्हारी गोर ती साईं ओ,
राज घाट्यांरी मुकुट करो।
ब्रह्मदास बीरा,
ईसरदास राज घाट्यांरी मुकुट करो।
ब्रह्मदासजी रा कानीराम,
राज घाट्यांरी मुकुट करो।
म्हारी गोरां न पाणीड़ा प्याई ओ,
राज घाट्यांरी मुकुट करो।
धूप का गीत इन हिंदी
धूपियो देर धूपईयो ए,
द्यो बाई रोवाक हाथ।
अगर देवर पाइयो ए,
पायो सूरजमल भरतार।
ज तेरो धूपियो सापज ए,
सुहागण सांज सबेर।
हाथां मेहँदी,
सिर धड़ी ए,
चूड़ला रो सर्व सुहाग।
कोयाँ काजल धुल रयो ए,
बिंदली रो सर्व सुहाग।
रात का गीत इन हिंदी
म्हार माथा न मैंमद ल्याओ रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
म्हारी रखड़ी रतन जड़ाओ रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
गैरो गैरोजी सासुजी थारो जायो रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
म्हारी हथेली फरूक रुपिया ल्याओ रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
म्हारा काना म कुंडल ल्याओ रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
म्हारा चुड़ला म टीप लगाओ रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
गैरो गैरोजी बाईजी थारो बीरो रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
म्हारी जीभड़ली फरूक बरफी ल्याओ रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
म्हारी आंगालियाँ न बीटी ल्याओ रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
म्हारी बेसर बैठ जड़ाओ रंगरसिया,
गैरोजी फूल गुलाब को।
माटी ल्यान का गीत इन हिंदी
ईसरदास बीरा,
लीलड़ी पलाण क टिक्की ल्यादो जड़ाव की जी।
कानीराम बीरा,
लीलड़ी पलाण क टिक्की ल्यादो जड़ाव की जी।
टिक्की चेप हेमाजलजी की धीय क,
ब्रह्मादासजी की कुल बहू जी।
टिक्की चेप साजनियारी धीय क,
ब्रह्मादासजी की कुल बहू जी।
सबेर का गीत इन हिंदी
हरिये गोबर गीली दाबो,
मोत्यां चोक पुरावो।
मोत्यां का दोय आखा ल्यावो,
निरणी गोर पुजावो॥
गोर ए गणगौर माता,
खोल किवाड़ी।
बाहेर ऊठी रोवां,
पूजण वाली॥
पूजो एक पुजावो सइयां,
क्या फल माँगा।
माँगा ए म्हे अन्न धन,
लाछर लक्ष्मी॥
जलहर जामी बाबुल माँगा,
राता देई मायण।
कान कंवर सो बीरो माँगा,
राई सी भोजाई॥
ऊँट चडयो बहनोई माँगा,
चूड़ल वाली भैणड़।
पूत पिछोकड़ फूफो माँगा,
मांडा पोवण भुवा॥
लाल दुशाला चाचा माँगा,
बिणजारी सी चाची।
गोर ए गणगौर माता,
खोल किवाड़ी॥
गारा की गणगौर गीत इन हिंदी
गारा की गणगौर कुआ पर क्यों रे खड़ी है।गणगौर कथा पुस्तक
सिर पर लम्बे-लम्बे केश, गले में फूलों की माला पड़ी रे।।
गारा की गणगौर...
चल्यो जा रे मूरख अज्ञान, तुझे मेरी क्या पड़ी रे।
म्हारा ईशरजी म्हारे साथ, कुआ पर यूं रे खड़ी रे।।
गारा की गणगौर...
माथा ने भांवर सुहाय, तो रखड़ी जड़ाव की रे।
कान में झालज सुहाय, तो झुमकी जड़ाव की रे।।
गारा की गणगौर...
मुखड़ा ने भेसर सुहाय, तो मोतीड़ा जड़ाव का रे।
हिवड़ा पे हांसज सुहाय, तो दुलड़ी जड़ाव की रे।।
गारा की गणगौर...
तन पे सालू रंगीलो, तो अंगिया जड़ाव की रे।
हाथों में चुड़ला पहना, तो गजरा जड़ाव का रे।।
गारा की गणगौर...
पावों में पायल पहनी, तो घुंघरू जड़ाव का रे।
उंगली में बिछिया सुहाय, तो अनवट जड़ाव का रे।।
गारा की गणगौर...
पाटा धोने का गीत इन हिंदी
पाटो धोय पाटो धोय , बीरा की बहन पाटो धो ,
पाटा ऊपर पिलो पान , महे जास्या बीरा की जान ,
जान जास्या , पान खास्या , बीरा न परनार ल्यास्या ,
अली गली में साँप जाय , भाभी थारो बाप जाय ,
अली गली गाय जाय , भाभी तेरी माय जाये ,
दूध में डोरों , म्हारो भाई गोरो ,
खाट पर खाजा , म्हारो भाई राजा ,
थाली में जीरो म्हारो भाई हीरो ,
थाली में हैं , पताशा बीरा करे तमाशा
ए खेले नंदी बैल , ओ पानी कठे जासी राज ,
आधो जासी अली गली ,आधो ईसर न्हासी राज ,
ईसर जी तो न्हाय लिया , गौर बाई न्हासी राज ,
गौरा बाई रे बेटो जायो , भुवा बधाई ल्याई राज ,
अरदा तानो परदा तानो , बंदरवाल बंधाओ राज ,
सार की सुई पाट का धागा , भुआ बाई के कारने भतीजा रहगया नागा ,
नागा नागा काई करो और सिवास्या बागा..
यह लेख मूल रूप से गौरांगी (Gaurangi) द्वारा लिखा गया है, वह टाइम्स नाउ नवभारत के साथ बतौर इंटर्न जुड़ी हुई हैं।
