गणगौर पूजा के पहले पढ़ें गणेश जी की कहानी, Ganesh Ji Ki Kahani: गणगौर राजस्थान तो उत्तर प्रदेश का प्रमुख त्योहार है। जो होली के अगले दिन से शुरू होकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक लगभग 16-18 दिनों तक चलता है। आज 21 मार्च को भारत में गणगौर पूजा (Gangaur Puja) का पर्व मनाया जा रहा है। गणगौर व्रत में माता पार्वती और शिव जी की पूजा होती है। मान्यता है इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। शादीशुदा महिलाओं के साथ अविवाहित लड़कियां भी ये व्रत करती हैं। अगर आप इस व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त करना चाहते हैं तो आज के दिन गणगौर की कहानी के साथ गणेश जी की कहानी (Ganesh Ji Ki Kahani) भी जरूर पढ़ें।
गणगौर पूजा गणेश जी की कहानी
एक समय की बात है, एक वृद्धा प्रतिदिन मिट्टी से गणेश जी की मूर्ति बनाकर श्रद्धा से उनकी पूजा करती थी। लेकिन मिट्टी की मूर्ति रोज बनती और रोज ही नष्ट हो जाती। एक दिन उसके घर के पास एक धनवान सेठ का मकान बन रहा था। वृद्धा ने वहाँ काम कर रहे कारीगरों से कहा कि वे उसके लिए पत्थर की गणेश जी की मूर्ति बना दें, ताकि वह स्थायी रूप से पूजा कर सके।
मिस्त्रियों ने यह कहकर मना कर दिया कि जितना समय और मेहनत मूर्ति बनाने में लगेगी, उतने में वे अपनी दीवार भी पूरी नहीं कर पाएंगे। यह सुनकर वृद्धा को बहुत क्रोध आया और उसने नाराज होकर कह दिया कि भगवान करे उनकी बनाई दीवार टेढ़ी हो जाए। आश्चर्य की बात यह थी कि उसके ऐसा कहते ही दीवार सच में सीधी नहीं बन पा रही थी। मिस्त्री बार-बार दीवार बनाते और वह हर बार बिगड़ जाती।
शाम तक यही चलता रहा। जब सेठ वहाँ पहुँचा, तो उसने देखा कि पूरे दिन में कोई काम आगे नहीं बढ़ा। पूछने पर कारीगरों ने सारी बात बताई। सेठ ने तुरंत उस वृद्धा को बुलवाया और उससे विनती की कि वह अपनी बात वापस ले ले और उनकी दीवार को ठीक कर दे। बदले में सेठ ने उसे सोने की गणेश जी की सुंदर मूर्ति बनवाकर देने का वचन दिया।
वृद्धा ने सहमति दी और जैसे ही उसे सोने की मूर्ति मिली, सेठ की दीवार भी तुरंत सीधी हो गई। यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास में अद्भुत शक्ति होती है। जैसे गणेश जी ने सेठ की समस्या दूर की, वैसे ही वे सबकी परेशानियाँ हरते हैं।
