Ganesh Visarjan Puja, Havan Mantra (गणेश विसर्जन पूजा, हवन मंत्र): गणेश चतुर्थी पर घर में विराजे गणपति बप्पा को अनंत चतुर्दशी के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ विदा किया जाता है। जिस उत्साह से बप्पा का स्वागत होता है, उसी भाव से विसर्जन के समय पूजा, आरती, भजन और जयकारे किए जाते हैं। कई घरों में प्रतिमा विसर्जन से पहले हवन करने की भी परंपरा है। इस दौरान भगवान गणेश को याद करते हुए मंत्रों का जाप और अग्नि में आहुति दी जाती है। यहां गणेश विसर्जन के समय बोले जाने वाले मंत्र और हवन की सामान्य विधि दी जा रही है।
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गणेश विसर्जन पूजा मंत्र
ॐ मोदाय नमः
ॐ प्रमोदाय नमः
ॐ सुमुखाय नमः
ॐ दुर्मुखाय नमः
ॐ अविघ्नाय नमः
ॐ विघ्नकर्त्रे नमः
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गणेश जी के मंत्र
- ॐ यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम्। इष्टकामसमृद्ध्यर्थं पुनरागमनाय च॥
- ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा॥
- ॐ गं गणपतये सर्वकार्यसिद्धिं कुरु कुरु स्वाहा॥
- गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात्॥
- ॐ श्री वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गणेश विसर्जन हवन मंत्र इन संस्कृत
ॐ अग्नये नमः।
इस मंत्र का 7 बार जाप किया जा सकता है।
इसके बाद गुरु का स्मरण करते हुए..
ॐ गुरुभ्यो नमः।
इसका 21 बार जाप करें।
अब हवन में आहुति देने की प्रक्रिया शुरू करें,
ॐ अग्नये स्वाहा। — 7 आहुति।
इसके बाद
ॐ गं स्वाहा। — 1 आहुति।
ॐ भैरवाय स्वाहा। — 11 आहुति।
ॐ गुरुभ्यो नमः स्वाहा। — 16 आहुति।
ॐ गं गणपतये स्वाहा। — 108 आहुति।
आहुति देते समय श्रद्धा और मन की एकाग्रता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
हवन पूरा होने के बाद गणपति बप्पा से अपने परिवार पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें। पूजा के दौरान जाने-अनजाने हुई किसी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगें। इसके बाद जल छिड़कते हुए तीन बार ऊँ शांति, शांति, शांति का उच्चारण किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश विसर्जन के दौरान भगवान गणेश के नाम और मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। भक्तों का विश्वास है कि बप्पा की विदाई केवल प्रतिमा का विसर्जन नहीं, बल्कि उनके आशीर्वाद और शुभ भावनाओं को अपने जीवन में बनाए रखने का अवसर भी है।
