Durva Ashtami 2026: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इसी तिथि पर दूर्वा अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा कर उन्हें दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। साल 2026 में दूर्वा अष्टमी की तारीख को लेकर लोगों के मन में असमंजस है कि यह व्रत 18 सितंबर को रखा जाए या 19 सितंबर को। पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष दूर्वा अष्टमी 18 सितंबर 2026, शुक्रवार को ही मनाई जा रही है।
दूर्वा अष्टमी 2026 (Photo - Pinterest)
कब है दूर्वा अष्टमी?
पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 18 सितंबर को दोपहर करीब 1 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 19 सितंबर को दोपहर करीब 3:26 बजे तक रहेगी। हालांकि व्रत में पूजा के मुहूर्त और पर्व विशेष की परंपरा को ध्यान में रखा जाता है। इसी आधार पर 18 सितंबर को दूर्वा अष्टमी का पर्व माना गया है।
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दूर्वा अष्टमी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं में दूर्वा को पवित्र और भगवान गणेश को प्रिय माना गया है। दूर्वा अष्टमी पर गणपति को दूर्वा अर्पित करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि दूर्वा की तरह परिवार की वृद्धि और सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत किया जाता है। कुछ परंपराओं में इसे संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और परिवार की मंगलकामना से भी जोड़ा गया है।
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दूर्वा अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त
18 सितंबर के पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। वहीं अमृत काल दोपहर 12:54 बजे से 2:41 बजे तक है। पूजा के लिए इन शुभ अवधियों का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक रहेगा, इसलिए शुभ कार्य शुरू करते समय इसे ध्यान में रखना उचित माना जाता है।
दूर्वा अष्टमी की पूजा विधि
दूर्वा अष्टमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर गणेश जी का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद गणेश जी को जल, अक्षत, रोली और फूल अर्पित करें। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण दूर्वा होती है। श्रद्धापूर्वक ताजी दूर्वा अर्पित करें और गणपति मंत्र का जाप करें। इसके बाद मोदक या अपनी श्रद्धानुसार किसी सात्विक मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। अंत में गणेश जी की आरती करें।
गणेश जी को दूर्वा कैसे चढ़ाएं
गणेश पूजा में दूर्वा अर्पित करते समय उसे साफ और ताजा रखना चाहिए। दूर्वा को श्रद्धा से अर्पित करना पूजा का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में गणेश जी को दूर्वा की छोटी-छोटी गांठें अर्पित करने का भी विधान मिलता है। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाते हुए “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप किया जा सकता है।
