Dhanteras 2026 Shubh Sanyog: धनतेरस का त्योहार इस बार बेहद खास होने वाला है। इसकी एक वजह है शुक्रवार का संयोग। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। वहीं धनतेरस पर भी मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है। ऐसे में इस बार धनतेरस शुक्रवार को पड़ने से इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
धनतेरस 2026 पर क्या है खास संयोग (AI Image)
मान्यता है कि धनतेरस पर विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। परिवार में खुशहाली बनी रहती है और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति की कामना की जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का भी विशेष महत्व है। आइए जानते हैं धनतेरस 2026 की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और मां लक्ष्मी की पूजा करने की सही विधि।
धनतेरस 2026 पर क्या है खास संयोग
इस साल धनतेरस 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का प्रिय दिन माना जाता है। वहीं धनतेरस पर भी धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। यही वजह है कि शुक्रवार और धनतेरस का यह मेल भक्तों के लिए खास माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और वैभव की कामना पूरी होती है। धनतेरस पर इस दिन शाम को प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
इस संयोग को लेकर एक और खास बात यह है कि धनतेरस हर साल अलग-अलग तारीख और वार को आती है। इसलिए शुक्रवार को पड़ने वाले इस पर्व को विशेष संयोग के रूप में देखा जा रहा है।
धनतेरस 2026 कब है
हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य की मान्यता भी जुड़ी हुई है। साल 2026 में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को शुरू होकर 7 नवंबर तक रहेगी।
- धनतेरस की तारीख: 6 नवंबर 2026, शुक्रवार
- त्रयोदशी तिथि आरंभ: 6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में होने के कारण 6 नवंबर को ही धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा।
धनतेरस 2026 लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर शाम के समय मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। दिल्ली और नोएडा के पंचांग के अनुसार, इस बार पूजा का शुभ समय शाम 6:01 से 7:57 बजे तक रहेगा।
- धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 6:01 से 7:57 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक
- वृषभ काल: शाम 6:01 से 7:57 बजे तक
वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
धनतेरस पर कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा
धनतेरस के दिन पूजा से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य द्वार को फूलों और रंगोली से सजाएं। शाम को पूजा की तैयारी करें। इसके लिए मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
पूजा की विधि इस प्रकार है:
1. सबसे पहले पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी बिछाएं।
2. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की प्रतिमा स्थापित करें।
3. भगवान गणेश का ध्यान करके पूजा की शुरुआत करें।
4. मां लक्ष्मी को लाल फूल, अक्षत, रोली, हल्दी और कमल का फूल अर्पित करें।
5. मां लक्ष्मी को फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं।
6. इसके बाद भगवान कुबेर की पूजा करें और धन-समृद्धि की कामना करें।
7. मां लक्ष्मी की आरती करें और घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से परिवार को आरोग्य और अच्छी सेहत का आशीर्वाद मिलता है।
धनतेरस पर क्यों करें मां लक्ष्मी का पूजन
धनतेरस को केवल सोना-चांदी या नए बर्तन खरीदने का दिन मानना सही नहीं होगा। यह पर्व हमें धन के साथ अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन का महत्व भी समझाता है। मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। वहीं भगवान कुबेर धन के रक्षक माने जाते हैं।
इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करके भक्त अपने घर में सुख-शांति और बरकत बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं। शुक्रवार के विशेष संयोग में यह पूजा और भी शुभ मानी जा रही है। इसलिए इस धनतेरस पर खरीदारी के साथ पूजा-पाठ और दीपदान के लिए भी समय जरूर निकालें।
