Chitragupta Puja Mantra (चित्रगुप्त पूजा मंत्र): हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त पूजा मनाया जाता है। चित्रगुप्त पूजा को कलम दवात पूजा भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन किताब, कलम, दवात और बहीखातों की पूजा की जाती है। साथ ही कई जगह इस दिन से नए बहीखातों की शुरूआत भी हो जाती है। पुराणों के अनुसार चित्रगुप्त पूजा से व्यक्ति को मृत्यु के बाद विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। अगर आप भी चित्रगुप्त पूजा कर रहे हैं तो आपको कुछ खास मंत्रों का जाप करना चाहिए। यहां से आप चित्रगुप्त जी महाराज की पूजा के मंत्र देख सकते हैं।
चित्रगुप्त जी का ध्यान मंत्र-
चित्रगुप्त महाभाग त्रैलोक्य ग्रन्थिकारक।
लेखिनी पतरी हस्ते च पश्यन्ति यमसायकम्॥
अर्थ-
हे चित्रगुप्त जी! आप तीनों लोकों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले हैं। आपके हाथों में लेखनी और पटरी है और आप यमराज के सहायकों को दिशा दिखाते हैं।
चित्रगुप्त पूजा संकल्प मंत्र-
मम समस्त पापक्षयपूर्वक
सकल शुभफल प्राप्त्यर्थं
श्री चित्रगुप्त पूजनं करिष्ये॥
अर्थ-
मैं अपने समस्त पापों के नाश और शुभ फलों की प्राप्ति हेतु
भगवान चित्रगुप्त जी का पूजन करता/करती हूँ।
चित्रगुप्त पूजा के समय जपने वाला मंत्र-
कलम-दवातं सम्पूज्य चित्रगुप्तं स्मरेन्नरः।
लेखिनी-पत्रयुक्तं च पुस्तकं च विशेषतः॥
अर्थ-
जो व्यक्ति कलम-दवात और पुस्तक की पूजा करके
चित्रगुप्त जी का स्मरण करता है, उसे विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
चित्रगुप्त स्तुति मंत्र-
जय चित्रगुप्त भगवान, जय धर्मराज सहाय।
लेखनी-दवात के अधिपति, पुण्य-पाप के ज्ञाय॥
आपका नाम जपें जो प्राणी, पाप से हो दूर।
सच का लेखा रखने वाले, आप महान भरपूर॥
प्रसाद अर्पण मंत्र-
नैवेद्यं गृह्यतां देव चित्रगुप्त नमोस्तुते।
भक्त्या प्रदत्तं नैवेद्यं, मया सुप्रीति कारणात्॥
