Chandra Grahan Katha In Hindi, Chandra Grahan Rahu Ketu Story (चंद्र ग्रहण की कथा, राहु केतु की कहानी क्या है): चंद्र ग्रहण की पौराणिक कथा के अनुसार एक बार सारे देवता और दानवों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था। समुद्र मंथन के दौरान समुद्र में से अमृत और विष दो कलश की प्राप्ति हुई थी। विष का धारण भगवान शिव ने अपने कंठ में किया था। वहीं अमृत पान के लिए देवताओं और दानव में होड़ मची थी।
दानव अमृत का पान करके अमर होना चाहते थे, लेकिन भगवान विष्णु देवताओं को अमर करना चाहते थे। देवताओं को अमृत पिलाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रुप धारण किया। भगवान विष्णु के मोहिनी रूप को देखर सारे दानव मंत्र मुग्ध हो गए। मोहिनी रूप में भगवान विष्णु देवताओं को अमृत पिला रहे थे कि तभी राहु नामक दानव देवताओं का रूप धारण करके अमृत पीने के लिए देवताओं की पंक्ति में बैठ गया। इसकी वजह से मोहिनी ने राहु को देवता समझकर अमृत पिला दिया।
राहु के असली वेश को सूर्य देव और चंद्र देव पहचान गए और उन्होंने भगवान विष्णु से राहु का असली रूप बता दिया। राहु के सच का पता चलते ही विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु की गर्दन काट दी, परंतु अमृत पाने के कारण उसकी मृत्यु नहीं हो पाई और उसका शरीर दो हिस्सों में बंट गया। एक हिस्सा राहु और दूसरा केतु बना ये दोनों ही उपग्रह माने जाते हैं। इस घटना के बाद से राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा को अपना शत्रु मानते हैं। जिसके कारण पूर्णिमा के दिन राहु चंद्रमा को अपनी छाया से ग्रसित कर देते हैं। जिसके कारण चंद्र ग्रहण लगता है।
चंद्र देव की आरती लिरिक्स (Chandra Dev Ki Aarti Lyrics In Hindi)-
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
