Chaitra Navratri Puja Time 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक बहुत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसमें 9 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। यह पर्व चैत्र महीने में आता है और इसे हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं, सात्विक भोजन करते हैं और घर में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन करते हैं। सुबह-शाम आरती की जाती है और माता को फल, फूल और मिठाई का भोग लगाया जाता है। बता दें कि चैत्र नवरात्रि की पूजा शुभ मुहूर्त देखकर की जाती है। यहां से आप इसके बारे में जान सकते हैं।
चैत्र नवरात्रि 2026 पूजा का समय-
चैत्र नवरात्रि की पूजा के लिए सुबह का शुभ समय लगभग 06:20 बजे से 10:15 बजे तक है।ये समय अभिजीत मुहूर्त और शुभ चौघड़िया के अनुसार सबसे अच्छा माना जाता है।
चैत्र नवरात्रि पूजा सामग्री लिस्ट-
चैत्र नवरात्र के लिए मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर, चौकी पर बिछाने के लिए लाल रंग का कपड़ा, थोड़ी पीसी हुई हल्दी, आसन, चौकी, मौली, रोली, बंदनवार, सोलह श्रृंगार समान, कमलगट्टा, शहद, शक्कर, सिंदूर,पान, सुपारी, लौंग, बताशा, सूखा नारियल, पंचमेवा, गंगाजल, नवग्रह पूजन के लिए चावल, पूजा की थाली, दीपक, घी, अगरबत्ती, वस्त्र, हल्दी की गांठ, नैवेध, जावित्री, नारियल जटा वाला, दही आदि।
दुर्गा माता मंत्र
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
चैत्र नवरात्रि पूजा विधि-
चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा विधि बहुत सरल लेकिन महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थान को तैयार किया जाता है और माता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित की जाती है। पहले दिन घटस्थापना की जाती है, जिसमें मिट्टी में जौ बोकर उसके ऊपर पानी से भरा कलश रखा जाता है, जिसमें गंगाजल, चावल, सुपारी और सिक्का डाला जाता है तथा ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है। इसके बाद रोजाना माता को फूल, रोली, चंदन, फल और मिठाई अर्पित की जाती है, दीपक और अगरबत्ती जलाकर दुर्गा चालीसा या मंत्रों का पाठ किया जाता है। भक्त पूरे 9 दिनों तक व्रत रखकर सात्विक भोजन करते हैं और सुबह-शाम आरती करते हैं। अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें छोटी बच्चियों को माता का रूप मानकर भोजन कराया जाता है। श्रद्धा और नियम के साथ की गई यह पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।
किस दिशा में बैठकर करें नवरात्रि की पूजा?
हिंदू मान्यता के अनुसार, यदि कोई कार्य सही समय पर सही दिशा में किया जाए तो उसमें जरूर सफलता प्राप्त होती है। ऐसे में नवरात्रि की पूजा भी शुभ मुहूर्त में करने के साथ ही साथ सही दिशा में बैठकर करनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, साधक को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में बैठकर ही नवरात्रि की पूजा करनी चाहिए। वास्तु नियमों के अनुसार, ईशान कोण देवी पूजा के लिए अत्यधिक शुभ और फलदायी माना गया है। इसी प्रकार पूजा करते समय आपका मुख भी उत्तर, पूर्व या फिर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना सबसे उत्तम होता है।
