Chaitra Navratri 2026 Ghat Sthapna Muhurat: आज कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है, जानें घटस्थापना का मंत्र, क्या घटस्थापना में व्रत रखना होता है
Chaitra Navratri Par Kalash Sthapna Ka Samay Aur Saman Ki List (चैत्र नवरात्री घटस्थपना मुहूर्त पूजा विधि 2026) Shubh Muhurat Timing, Puja Vidhi, Mantra, Samagri List: 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्र आरंभ हो रहे हैं। नवरात्र के पहले दिन जहां मां शैलपुत्री की पूजा होती है, वहीं नौ दिनों में मां के अलग अलग स्वरूपों की पूजा से पहले कलश स्थापना का भी विधान है। यहां आप नवरात्र 2026 के पहले दिन की पूरी जानकारी ले सकते हैं। साथ ही अलग अलग मुहूर्त के बारे में भी जान सकते हैं। जानें कि बिना पंडित के घर पर कलश स्थापना कैसे करें। नोट करें आज कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है, आज घटस्थापना कब तक कर सकते हैं। इसके लिए क्या सामग्री चाहिए होगी। क्या घटस्थापना से पहले व्रत रखना जरूरी होता है? घटस्थापना में कौन सा मंत्र पढ़ें?
चैत्र नवरात्री 2026 कलश स्थापना मुहूर्त
सुबह 06 :53 से 07:17 तक
12:22 से 01:10 तक अभिजीत बेला
11:16 से 12:46 तक चंचल बेला
12:46 से 03 46 लाभ
अमृत बेला में पूजन एवं घटस्थपना करना श्रेष्ठ रहेगा
Navratri 2026 Par Kalash Sthapna Ka Samay Aur Saman Ki List, Puja Vidhi, Mantra, Samagri List Updates: 19 मार्च 2026 को चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन गुरुवार है और साथ ही इसी तारीख से चैत्र नवरात्र की भी शुरूआत हो रही है। नवरात्र के पहले दिन पूजन आरंभ करने के साथ ही कलश स्थापना की जाती है। 19 मार्च को घट स्थापना की विधि, मुहूर्त, सामग्री आदि की पूरी जानकारी हम आपको यहां दे रहे हैं। बता दें कि नवरात्र में कलश स्थापना मां दुर्गा के आगमन और शक्ति के प्रतीक के रूप में की जाती है। यहां देखें कि घर पर विधिवत कलश स्थापना कैसे कर सकते हैं। यहां से जानें कि आज कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है, आज घटस्थापना कब तक कर सकते हैं। साथ ही नोट करें कलश स्थापना में क्या क्या सामग्री लगेगी। क्या घटस्थापना करने से पहले व्रत रखना चाहिए? घटस्थापना करते हुए कौन-से मंत्र पढ़ने चाहिए?
कलश स्थापना के लिए क्या-क्या सामग्री चाहिए
- मिट्टी का कलश
- गंगाजल
- आम या अशोक के पत्ते
- नारियल
- जौ (जवारे)
- रोली
- अक्षत
- फूल
- लाल कपड़ा
- इलायची
- सिक्का
चैत्र नवरात्रि 2026 कलश स्थापना कब करें
- चैत्र नवरात्रि 2026 के पहले दिन यानी 19 मार्च को अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना करना सबसे शुभ रहेगा। यह समय दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक रहेगा।
- चैत्र नवरात्रि 2026 की कलश स्थापना आप विजय मुहूर्त में भी कर सकते हैं। यह शुभ समय दोपहर 2:30 बजे से दोपहर 3:18 बजे तक रहेगा।
- चैत्र नवरात्रि 2026 पर घट स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर 2:05 बजे से शुरू होकर 2:53 बजे तक का माना जा रहा है। इस समय में कलश स्थापना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें
यह पवित्र अनुष्ठान मां दुर्गा के स्वागत और उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रतीक माना जाता है। कलश में जल भरकर उसमें आम के पत्ते और नारियल स्थापित किया जाता है, जिसे सृष्टि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कलश में जल में लौंग, इलायची, चावल, वीनी और सिक्का रखा जाता है। घर के पूजा स्थान पर जौ (जवारे) बोकर कलश स्थापित करने की परंपरा भी निभाई जाती है। मान्यता है कि पूरे नौ दिनों तक इस कलश की पूजा करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
कलश स्थापना के दौरान कौन-सा मंत्र बोलें?
क्या महिलाएं कलश स्थापना कर सकती हैं?
जी हां, महिलाएं भी पूरी श्रद्धा के साथ कलश स्थापना कर सकती हैं। हालांकि इसमें जरूरी धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए।
नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाना जरूरी है क्या?
जी नहीं ये जरूरी नहीं है, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह बेहद शुभ माना जाता है।
क्या कलश स्थापना के बाद घर खाली छोड़ सकते हैं?
एक बार में इस सवाल का उत्तर नहीं है। कलश स्थापना के बाद कोशिश करें कि घर में कोई एक सदस्य हमेशा मौजूद रहे।
क्या ऑफिस या दुकान में भी कलश स्थापना कर सकते हैं?
घटस्थापना के जौ कब तक उगते हैं
घटस्थापना के बाद जौ उगने में 5–7 दिनों का समय लगता है। कलश में जौ उगने को एक शुभ संकेत माना जाता है।
क्या कलश स्थापना में व्रत रखना जरूरी है?
कलश स्थापना के लिए व्रत रखना वैकल्पिक है, लेकिन कई लोग श्रद्धा से व्रत रखते हैं।
कलश स्थापना कितने दिन तक रहती है?
नवरात्रों में कलश स्थापना पूरे 9 दिन यानी नवमी तक रहती है। इस कलश को बीच में नहीं उठाना चाहिए।
क्या घर में कोई भी कलश स्थापना कर सकता है?
जी हां, श्रद्धा, भक्तिभाव और पूजा के नियमों को फॉलो करके कोई भी व्यक्ति कर कलश स्थापना कर सकता है।
कलश किस दिशा में रखना चाहिए?
कलश स्थापना के बाद इसे पूजा स्थल के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में रखना शुभ होता है।
घट स्थापना के मंत्र
घट स्थापना पूजन सामग्री
कौन सी माता के दिन घटस्थापना होती है
कलश-स्थापन सम्पूर्ण सम्पूर्ण विधि मंत्र भाग 7
हस्तप्रक्षालन- दीप दिखाकर हाथ धो ले।
नैवेद्य - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, सर्वविधं नैवेद्यं निवेदयामि। (नैवेद्य निवेदित करे।)
आचमन आदि - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, आचमनीयं
जलम्, मध्ये पानीयं जलम्, उत्तरापोऽशने, मुख-प्रक्षालनार्थे, हस्तप्रक्षालनार्थे च जलं समर्पयामि। (आचमनीय एवं पानीय तथा मुख और हस्त-प्रक्षालनके लिये जल चढ़ाये।)
करोद्वर्तन - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, करोद्वर्तनं समर्पयामि। (करोद्वर्तनके लिये गन्ध समर्पित करे।)
ताम्बूल -
ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, ताम्बूलं समर्पयामि। (सुपारी, इलायची, लौंगसहित पान चढ़ाये।)
दक्षिणा -
ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, कृतायाः पूजायाः साद्गुण्यार्थे द्रव्यदक्षिणां समर्पयामि। (द्रव्य-दक्षिणा चढ़ाये।)
आरती - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, आरार्तिकं समर्पयामि। (आरती करे।)
पुष्पाञ्जलि - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, मन्त्रपुष्पाञ्जलिं समर्पयामि। (पुष्पाञ्जलि समर्पित करे।)
प्रदक्षिणा -
ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, प्रदक्षिणां समर्पयामि। (प्रदक्षिणा करे।)
हाथमें पुष्प लेकर इस प्रकार प्रार्थना करे-
प्रार्थना - देवदानवसंवादे
मध्यमाने महोदधौ । उत्पन्नोऽसि तदा कुम्भ विधृतो विष्णुना स्वयम् ॥ त्वत्तोये सर्वतीर्थानि देवाः सर्वे त्वयि स्थिताः । त्वयि तिष्ठन्ति भूतानि त्वयि प्राणाः प्रतिष्ठिताः ॥
कलश-स्थापन सम्पूर्ण सम्पूर्ण विधि मंत्र भाग 6
यज्ञोपवीत - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, यज्ञोपवीतं समर्पयामि। (यज्ञोपवीत चढ़ाये।)
आचमन
- ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, यज्ञोपवीतान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि। (आचमनके लिये जल चढ़ाये।)
उपवस्त्र
- ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, उपवस्त्रं (उपवस्त्रार्थ रक्तसूत्रम्) समर्पयामि। (उपवस्त्र चढ़ाये।)
आचमन
- ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, उपवस्त्रान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि। (आचमनके लिये जल चढ़ाये।)
चन्दन -
ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, चन्दनं समर्पयामि।
(चन्दन लगाये।)
अक्षत - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, अक्षतान् समर्पयामि।
(अक्षत समर्पित करे।)
पुष्प (पुष्पमाला) - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, पुष्पं (पुष्पमालाम्) समर्पयामि। (पुष्प और पुष्पमाला चढ़ाये।)
नानापरिमल-द्रव्य - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः,
नानापरिमलद्रव्याणि समर्पयामि। (विविध परिमल द्रव्य समर्पित करे।)
सुगन्धित द्रव्य - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, सुगन्धितद्रव्यं समर्पयामि। (सुगन्धित द्रव्य (इत्र आदि) चढ़ाये।)
धूप-ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, धूपमाघ्रापयामि। (धूप आघ्रापित कराये।)
चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि 2026 में घटस्थापना या कलश स्थापना 19 मार्च को की जाएगी। इसका पहला और मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 बजे तक है। यदि यह टाइम छूट जाए तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक घट स्थापना की जा सकती है।
कलश-स्थापन सम्पूर्ण सम्पूर्ण विधि मंत्र भाग 5
आसन ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, आसनार्थ अक्षतान् समर्पयामि। (अक्षत रखे।)
पाद्य - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, पादयोः पाद्यं समर्पयामि।
(जल चढ़ाये।)
अर्घ्य - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, हस्तयोरर्ध्वं समर्पयामि। (जल चढ़ाये।)
स्नानीय जल - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, स्नानीयं जलं समर्पयामि। (स्नानीय जल चढ़ाये।)
स्नानाङ्ग आचमन - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, स्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि। (आचमनीय जल चढ़ाये।)
पञ्चामृतस्नान - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, पञ्चामृतस्नानं समर्पयामि। (पञ्चामृतसे स्नान कराये।)
गन्धोदकस्नान -
ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, गन्धोदकस्नानं समर्पयामि। (जलमें मलयचन्दन मिलाकर स्नान कराये।)
शुद्धोदकस्नान -
ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, स्त्रानान्ते शुद्धोदकस्नानं समर्पयामि। (शुद्ध जलसे स्नान कराये।)
आचमन - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, शुद्धोदकस्नानान्ते आचमनीयं जलं समर्पयामि। (आचमनके लिये जल चढ़ाये।)
वस्त्र - ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः, वस्त्रं समर्पयामि।
(वस्त्र चढ़ाये।)
कलश-स्थापन सम्पूर्ण सम्पूर्ण विधि मंत्र भाग 4
फिर हाथमें अक्षत-पुष्प लेकर चारों वेद एवं अन्य देवी-देवताओंका आवाहन करे -
कलशमें देवी-देवताओंका आवाहन -
कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः । मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः ॥
कुक्षौ तु सागराः सर्वे सप्तद्वीपा वसुन्धरा। ऋग्वेदोऽथ यजुर्वेदः सामवेदो ह्यथर्वणः ॥
अङ्गैश्च सहिताः सर्वे कलशं तु समाश्रिताः । अत्र गायत्री सावित्री शान्तिः पुष्टिकरी तथा ॥
आयान्तु देवपूजार्थं दुरितक्षयकारकाः ।
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धुकावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥
सर्वे समुद्राः सरितस्तीर्थानि जलदा नदाः । आयान्तु मम शान्त्यर्थं दुरितक्षयकारकाः ॥
इस तरह जलाधिपति वरुणदेव तथा वेदों, तीर्थों, नदों, नदियों, सागरों, देवियों एवं देवताओंके आवाहनके बाद हाथमें अक्षत-पुष्प लेकर निम्नलिखित मन्त्रसे कलशकी प्रतिष्ठा करे-
प्रतिष्ठा - ॐ मनो जूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं तनोत्वारिष्टं यज्ञः समिमं दधातु। विश्वे देवास इह मादयन्तामो ३ म्प्रतिष्ठ ।।
कलशे वरुणाद्यावाहितदेवताः सुप्रतिष्ठिता वरदा भवन्तु । ॐ वरुणाद्यावाहितदेवताभ्यो नमः ।
- यह कहकर अक्षत-पुष्प कलशके पास छोड़ दे।
कलश-स्थापन सम्पूर्ण सम्पूर्ण विधि मंत्र भाग 3
कलशमें पञ्चरत्न * - ॐ परि वाजपतिः कविरग्निर्हव्यान्यक्रमीत्। दधद्रत्नानि दाशुषे ।
(पञ्चरत्न छोड़े।)
कलशमें द्रव्य - ॐ हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्। स दाधार पृथिवीं द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम ॥ (द्रव्य छोड़े।)
निम्नलिखित मन्त्र पढ़कर कलशको वस्त्रसे अलंकृत करे-
कलशपर वस्त्र - ॐ सुजातो ज्योतिषा सह शर्म वरूथमाऽसदत्स्वः । वासो अग्ने विश्वरूपः सं व्ययस्व विभावसो ॥
कलशपर पूर्णपात्र -
ॐ पूर्णा दर्वि परा पत सुपूर्णा पुनरा पत। वस्नेव विक्रीणावहा इषमूर्जः शतक्रतो । चावलसे भरे पूर्णपात्रको कलशपर स्थापित करे और उसपर लाल कपड़ा लपेटे हुए नारियलको निम्न मन्त्र पढ़कर रखे -
कलशपर नारियल - ॐ याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः । बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्वः हसः ॥
अब कलशमें देवी-देवताओंका आवाहन करना चाहिये। सबसे पहले हाथमें अक्षत और पुष्प लेकर निम्नलिखित मन्त्रसे वरुणका आवाहन करे-
कलशमें वरुणका ध्यान और आवाहन -
ॐ तत्त्वा यामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदा शास्ते यजमानो हविर्भिः ।
अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशः स मा न आयुः प्र मोषीः ॥
अस्मिन् कलशे वरुणं साङ्गं सपरिवारं सायुधं सशक्तिकमावाहयामि।
कलश-स्थापन सम्पूर्ण विधि मंत्र भाग २
(चन्दन छोड़े।)
कलशमें सर्वोषधि - ॐ या ओषधीः पूर्वा जाता देवेभ्यस्त्रियुगं पुरा। मनै नु बभ्रूणामहः शतं धामानि सप्त च ॥
(सर्वोषधि छोड़ दे।)
कलशमें दूब - ॐ काण्डात्काण्डात्प्ररोहन्ती परुषः परुषस्परि। एवा नो दूर्वे प्र तनु सहस्त्रेण शतेन च ॥
(दूब छोड़े।)
कलशपर पञ्चपल्लव' - ॐ अश्वत्थे वो निषदनं पर्णे वो वसतिष्कृता । गोभाज इत्किलासथ यत्सनवथ पूरुषम् ॥
(पञ्चपल्लव रख दे।)
कलशमें पवित्री - ॐ पवित्रे स्थो वैष्णव्यौ सवितुर्वः प्रसव उत्पुनाम्यच्छिद्रेण पवित्रेण सूर्यस्य रश्मिभिः । तस्य ते पवित्रपते पवित्रपूतस्य
यत्कामः पुने तच्छकेयम् ॥ (कुश छोड़ दे।)
कलशमें सप्तमृत्तिका - ॐ स्योना पृथिवि नो भवानृक्षरा निवेशनी। यच्छा नः शर्म सप्रथाः । (सप्तमृत्तिका छोड़े।)
