Chaitra Navratri Durga Saptashati Path: चैत्र नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा की उपासना के लिए सबसे पवित्र माने जाते हैं। इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इसका पाठ करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और साधक को मां भगवती की असीम कृपा प्राप्त होती है। नवरात्रि के दौरान नवचंडी, शतचंडी और सहस्त्र चंडी जैसे यज्ञों का आयोजन भी किया जाता है, जिनमें दुर्गा सप्तशती के अनेक पाठ किए जाते हैं। आइए कालका पीठ मंदिर के महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत से जानते हैं कि नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि और इसके फायदे।
दुर्गा सप्तशती पाठ
दुर्गा सप्तशती पाठ करने की सही विधि क्या है
दुर्गा सप्तशती का पाठ श्रद्धा के साथ-साथ सही विधि और नियमों के साथ करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत के अनुसार, पुस्तक को हाथ में पकड़कर नहीं, बल्कि चौकी या रेहल पर स्थापित करके पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही पाठ की शुरुआत से पहले कवच, कीलक और अर्गला स्तोत्र का उच्चारण अनिवार्य माना गया है, साथ ही तीनों रहस्यों का पाठ भी करना चाहिए। इन सभी विधियों के बाद ही मुख्य सप्तशती का पाठ प्रारंभ करना उचित होता है। मान्यता है कि यदि इन नियमों का पालन न किया जाए, तो पाठ अधूरा रह जाता है और उसका पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
कम समय में कैसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ
महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत के अनुसार, आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के लिए दुर्गा सप्तशती का पूरा पाठ करना संभव नहीं होता। ऐसे में आप केवल रात्रि सूक्त (पहला अध्याय) और देवी सूक्त (पांचवां अध्याय) का पाठ कर सकते हैं। इन दोनों सूक्तों का पाठ करने से भी मां दुर्गा की कृपा प्राप्त की जा सकती है। यह उन लोगों के लिए सरल और प्रभावी उपाय है, जो समय की कमी से जूझ रहे हैं।
क्या हिंदी में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सही है?
महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ मूल संस्कृत में ही करना चाहिए। हालांकि जो लोग स्वयं पाठ नहीं कर सकते हैं, वे विद्वानों द्वारा किए गए पाठ को सुनकर भी पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे लोगों को चाहिए कि वह पाठ को कराए और करें और उसका श्रवण करें।
दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व
दुर्गा सप्तशती हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली ग्रंथ है, जिसे मार्कंडेय पुराण का हिस्सा माना जाता है। इसमें 700 श्लोक हैं जिनके माध्यम से मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों और उनकी दैवी शक्तियों का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से तीन भागों—प्रथम, मध्यम और उत्तर चरित्र में विभाजित है। इसमें देवी के असुरों पर विजय की कथाएं शामिल हैं। नवरात्रि के दौरान इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। यह पाठ साधक को भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाकर शक्ति, साहस और सफलता प्रदान करता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख कालका पीठ मंदिर के महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत इस जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।
