Basant Panchami 2026 Date (बसंत पंचमी कब है) Live Update: 23 या 24 जनवरी, कब है बसंत पंचमी? नोट करें सरस्वती पूजा की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा की सामग्री लिस्ट
बसंत पंचमी 2026 में कब की है (Basant Panchami Kab Hai 2026 Mein)-
साल 2026 में बसंत पंचमी की सही डेट 23 जनवरी (When is Basant Panchami in 2026 in India:) को है। इस दिन शुक्रवार है। बसंत पंचमी की तिथि 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को 02:28 AM पर आरंभ होगी। इसका समापन 24 जनवरी 2026, शनिवार को 01:46 AM पर होगा। इस तरह 23 जनवरी को पूरा दिन बसंत पंचमी की डेट रहेगी।
बसंत पंचमी 2026 पूजा मुहूर्त (Basant Panchami Puja Muhurat 2026)-
बसंत पंचमी 2026 में 23 जनवरी, शुक्रवार को पड़ेगी। इस दिन पूजा के लिए 5 घंटे 36 मिनट का शुभ समय मिलेगा। बसंत पंचमी 2026 का पूजा का शुभ मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 07:15 AM से लेकर 12:50 PM के बीच का रहेगा।
मां सरस्वती का ध्यान मंत्र कौन सा है
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला,
या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वर दण्ड मण्डित करा,
या श्वेत पद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभि:
देवै: सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती,
निःशेष जाड्यापहा॥
नील सरस्वती मंत्र
घोर रूपे महारावे सर्वशत्रु भयंकरि।भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।१।।
ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।
जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।२।।
जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।
द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।३।।
सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोSस्तु ते।
सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणा गतम्।।४।।
जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला।
मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।५।।
वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नम:।
उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्।।६।।
बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे।
मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।७।।
इन्द्रा दिविलसद द्वन्द्ववन्दिते करुणा मयि।
तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणा गतम्।।८।।
अष्टभ्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां य: पठेन्नर:।
षण्मासै: सिद्धिमा प्नोति नात्र कार्या विचारणा।।९।।
मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्।
विद्यार्थी लभते विद्यां विद्यां तर्क व्याकरणा दिकम।।१०।।
इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाSन्वित:।
तस्य शत्रु: क्षयं याति महा प्रज्ञा प्रजा यते।।११।।
पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये।
य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशय:।।१२।।
इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनि मुद्रां प्रदर्श येत।।१३।।
।।इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।
सरस्वती पुष्पांजलि मंत्र
नमः भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमःवेद-वेदांग-वेदान्त-विद्यास्थानेभ्य एव च
एश श चंदना पुष्पा बिलवा पत्रांजलि
ॐ ओयिंग श्री सरस्वत्यै नमः
नमः भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः
वेद-वेदांग-वेदान्त-विद्यास्थानेभ्य एव च
एश श चंदना पुष्पा बिलवा पत्रांजलि
ॐ ओयिंग श्री सरस्वत्यै नमः
नमः भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः
वेद-वेदांग-वेदान्त-विद्यास्थानेभ्य एव च
एश श चंदना पुष्पा बिलवा पत्रांजलि
ॐ ओयिंग श्री सरस्वत्यै नमः
नमः भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः
वेद-वेदांग-वेदान्त-विद्यास्थानेभ्य एव च
एश श चंदना पुष्पा बिलवा पत्रांजलि
ॐ ओयिंग श्री सरस्वत्यै नमः
नमः भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः
वेद-वेदांग-वेदान्त-विद्यास्थानेभ्य एव च
एश श चंदना पुष्पा बिलवा पत्रांजलि
ॐ ओयिंग श्री सरस्वत्यै नमः
सरस्वती माता की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती के अवतरण के उपलक्ष्य में बसंत पंचमी मनाई जाती है। पुराणों में बताया गया है कि जगत रचियता ब्रह्माजी एक बार भ्रमण पर निकले तो उन्हें सारा ब्रह्मांड मूक नजर आया। चारों ओर अजीब सी खामोशी थी। यह देखकर उन्हें सृष्टि की रचना में कुछ कमी सी महसूस हुई। भ्रमण करते हुए ब्रह्माजी एक जगह ठहरे और अपने कमंडल से थोड़ा सा जल लेकर छिड़का तो एक महान ज्योतिपुंज में से एक देवी प्रकट हुईं। वीणा लिए यह देवी थीं मां सरस्वती। चेहरे पर अद्भुत तेज लिए मां सरस्वती ने ब्रह्माजी को प्रणाम किया। इस प्रकार वह ब्रह्माजी की पुत्री कहलाईं। उनके प्राकट्य के उत्सव के तौर पर बसंत पंचमी का उत्सव मनाया जाता है। मां सरस्वती के प्रकट होने पर ब्रह्माजी ने उनसे कहा कि इस सृष्टि में सभी जीव मूक हैं। ये केवल चल रहे हैं, इनमें आपसी संवाद करने की सामर्थ्य नहीं हैं। इस पर देवी सरस्वती ने उनसे पूछा, प्रभु मेरे लिए क्या आज्ञा है? ब्रह्माजी ने कहा, देवी आपको अपनी वीणा के सुरों से इस संसार को ध्वनि प्रदान करनी है, ताकि ये सभी आपस में संवाद कर सकें। एक-दूसरे के दुख-तकलीफ को समझ सकें। स्नेह दे सकें। उनकी आज्ञा का पालन करके मां सरस्वती के समस्त जीवों को आवाज प्रदान की।
बसंत पंचमी दान लिस्ट-
- सफेद अनाज
- मिठाई
- कपड़ा
- मूंग दाल
- हरी सब्जियां
- हरे अनाज
- चांदी
- खीर
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। कुछ प्रदेशों में इस दिन से ही शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। क्योंकि ये दिन विद्या आरम्भ करने के लिये काफी शुभ माना जाता है। सभी विद्यालयों में इस दिन सुबह के समय माता सरस्वती की पूजा की जाती है।
सरस्वती पूजा सामग्री लिस्ट-
- सरस्वती मां की मूर्ति
- पंचामृत या पवित्र जल
- फूल, विशेषकर पीले फूल जैसे गेंदा
- फूल माला या गेंदे के फूल की माला
- प्रसाद
- ऊन से निर्मित आसन या चटाई
- फल या फल विशेषकर आम, केला या पपीता
- फल जो पीले रंग के होते हैं
- हल्दी या हल्दी पाउडर
- जल रखने का कलश या पात्र
- प्याला या कटोरा
- साफ लाल कपड़ा
- शंख
- अगरबत्ती या धूपबत्ती
- अक्षत या चावल
- अष्टगंध/सुगंधित संतरे का पाउडर
- इत्र या सुगंध
- चंदन या चंदन की लकड़ी
- दीपक या लैंप
- दीपक जलाने के लिए रुई की बत्ती
- सिन्दूर
- सुपारी
- पवित्र जल
- घंटी
- घीया
- मक्खन
- गुड़
- ताम्बुलम या सुपारी
- थाली
- आम के पत्ते
- कमल
- केसर या केसर के धागे
- सिन्दूर लगाने के लिए कुमकुम या लाल पाउडर
- माचिस
- मिठाई, विशेष रूप से केसर हलवा/पीली मिठाई
सरस्वती वंदना प्रार्थना लिखी हुई
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥जयति पद्मासना माता,
जयति शुभ वरदायिनी ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
जगत का कल्याण कर मां,
तुम हो वीणा वादिनी।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
कमल आसन छोड़कर आ,
देख मेरी दुर्दशा मां ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
ज्ञान की सरिता बहा मां,
हे सकल जगतारणी ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
मां सरस्वती से आशीर्वाद कैसे मांगें?
सरस्वती पूजा के दिन मां सरस्वती का मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः - इसका जाप करके आशीर्वाद ले सकते हैं।
मां सरस्वती को कौन सा फूल पसंद है?
चढ़ाए जाने वाले फूल मां सरस्वती को मुख्य रूप से सफेद और पीले रंग के फूल बहुत प्रिय हैं, क्योंकि ये रंग ज्ञान, शुद्धता और सात्विकता का प्रतीक हैं। इसलिए आप माता को मोगरा, गंधराज, चांदनी, सदाबहार, अमरलीली, चंपा, लिली, रातरानी, डेजी चढ़ा सकते हैं।
सरस्वती मां का प्रिय भोग क्या है?
सरस्वती मां का प्रिय भोग मुख्य रूप से पीले रंग के मीठे पकवान होते हैं, जिनमें केसरिया मीठे चावल, बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, केसर की खीर, केसर पेड़ा, और मालपुआ शामिल हैं।
मां सरस्वती को कौन से फल चढ़ाए जाते हैं?
बसंत पंचमी के दिन, देवी सरस्वती को प्रसाद के रूप में विभिन्न खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। इनमें बेर, गाजर, खिचड़ी, बूंदी, गुड़ वाले चावल और पंचामृत जैसे मौसमी फल शामिल हैं।बसंत पंचमी पर क्या दान करना चाहिए?
बसंत पंचमी पर आप सफेद अनाज, मिठाई या फिर कपड़ों का दान कर सकते हैं। मिथुन राशि- मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए बसंत पंचमी के दिन मूंग दाल, हरे वस्त्र, हरी सब्जियां, हरे अनाज का दान करने की सलाह दी जाती है। कर्क राशि- मां सरस्वती की कृपा पाने के लिए बसंत पंचमी के दिन सफेद वस्त्र, चांदी और खीर का दान करें।मां सरस्वती की पूजा विधि
बसंत पंचमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान की साफ-सफाई कर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। माता शारदा ही मां सरस्वती हैं, इस कारण माता शारदा की मूर्ति की भी पूजा कर सकते हैं। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है, इसलिए पूजा में पीले वस्त्र, पीले फूल और पीले मिष्ठान का उपयोग शुभ माना जाता है। पूजा की शुरुआत गणेश पूजन से करें, फिर मां सरस्वती को जल, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। देवी को पुस्तक, कलम, वाद्य यंत्र और खीर या पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद ‘ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः’ मंत्र का जप करें या सरस्वती वंदना का पाठ करें। अंत में मां सरस्वती की आरती कर शिक्षा, ज्ञान और विवेक की प्रार्थना करें।बसंत पंचमी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 23 जनवरी 2026 को सुबह 02 बजकर 29 मिनट से होगी और इसका समापन 24 जनवरी 2026 को सुबह 01 बजकर 45 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर बसंत पंचमी का पर्व शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।राजनेता जरूर करें बसंत पंचमी पर ये उपाय
जो लोग सार्वजनिक मंच पर बोलते हैं राजनेता हैं, उनको बसंत पचंमी के दिन ये उपाय जरूर करना चाहिए। ऐसे लोगों को इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए, स्वच्छ और श्वेत वस्त्र धारण करने चाहिए और एक शांत स्थान पर आसन लगाकर बैठना चाहिए। इसके बाद तिल के तेल का दीपक जलाएं, मां सरस्वती के यंत्र की स्थापना करें और भगवती सरस्वती के अत्यंत प्रभावशाली मंत्र 'ॐ वद वद वाग्वादिनी स्वाहा' का जाप करें। इस मंत्र का जाप लगातार 21 दिनों तक श्रद्धा और नियम के साथ जाप करने का विधान बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से धीरे-धीरे व्यक्ति की वाणी में प्रभाव आता है, आत्मविश्वास बढ़ता है। मां सरस्वती की कृपा से वाणी मधुर, स्पष्ट और प्रभावशाली बनती है। लोगों पर उनकी वाणी का प्रभाव पड़ता है।बसंत पचंमी पर होती हैं माता लक्ष्मी की भी पूजा
दक्षिण भारत में बसंत पंचमी को श्री पंचमी के नाम से जाना जाता है। यहां ‘श्री’ शब्द देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन लक्ष्मी पूजन का भी विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती की कथा से भी जुड़ा है। कहा जाता है कि इसी दिन माता पार्वती ने भगवान शिव की कठोर तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव को भेजा था। इस घटना को सृष्टि में प्रेम और सृजन के आरंभ का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से बसंत पंचमी को प्रेम, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा पर्व माना जाता है।भगवान शिव से भी जुड़ी है बसंत पंचमी
बसंत पंचमी का दिन केवल मां सरस्वती की आराधना तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह तिथि भगवान महादेव से भी जुड़ी है। शास्त्रों के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन भगवान शिव अपनी योगमुद्रा से बाहर आए थे और इसी दिन माता पार्वती के साथ उनके वैवाहिक जीवन की पहली औपचारिक रस्म संपन्न हुई थी। मान्यता है कि माघ मास की पंचमी तिथि पर देवताओं ने महादेव का तिलक किया था, जिसे शिव-पार्वती की सगाई का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद फाल्गुन मास की महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पवित्र विवाह संपन्न हुआ। वहीं, फाल्गुन शुक्ल एकादशी को माता पार्वती का गौना माना जाता है। यही कारण है कि बसंत पंचमी को महादेव के तिलक का दिन कहा जाता है और इस दिन शिव की पूजा करने से सुखद और स्थिर वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलने की मान्यता है।पंचक में पड़ेगी बसंत पचंमी
इस बार बसतं पचंमी पंचक में पड़ रही है। हालांकि ये पंचक दोषरहित रहेगा, लेकिन इसके बाद भी इस दौरान कुछ शुभ कार्यों को करना शुभ नहीं रहेगा। इस समय घर की नींव डालना, छत ढलवाना या नया निर्माण शुरू करने से बचना चाहिए। पंचक काल में लकड़ी या लोहे का सामान खरीदना भी उचित नहीं माना जाता है।बसंत पचंमी पर जरूर करें ये सरस्वती वंदना
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥१॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् ।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम् ॥२॥
बसंत पंचमी पर बन रहा है शुभ संयोग
बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा मीन राशि में मौजूद रहेंगे। यह गुरु की राशि है। वहीं, गुरु स्वयं मिथुन राशि में मौजूद रहेंगे। माना जाता है कि जब चंद्रमा और गुरु एक-दूसरे से (1, 4, 7, 10) भाव में हों, तब गजकेसरी योग का निर्माण होता है। ऐसे में मीन राशि से मिथुन चौथी राशि है, तो यहां भी गजकेसरी योग का निर्माण हो जाएगा। इसका मतलब है कि बसंत पंचमी पर गजकेसरी योग रहेगा, जो बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान मां सरस्वती की पूजा करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।माता सरस्वती को लगाएं इन चीजों का भोग
माता सरस्वती को बसंत पंचमी के दिन मालपुआ का भोग लगाना चाहिए। इसके साथ ही आप केसर की खीर, बेसन का लड्डू या कोई पीली बर्फी का भी भोग लगा सकते हैं।बसंत पचंमी पर इन चीजों से रहें दूर
बसंत पंचमी के दिन कुछ चीजों से बचना चाहिए ताकि दिन का शुभ प्रभाव बना रहे। इस दिन झगड़ा, गाली-गलौज, झूठ बोलना और किसी से नफरत रखना नहीं चाहिए। इस दिन पेड़-पौधों को काटने से बचना चाहिए। इसके अलावा अधर्म या चोरी, दूसरों की निंदा और अनावश्यक खर्च भी टालना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, बसंत पंचमी पर सकारात्मक सोच और शांत मन रखना जरूरी है ताकि मां सरस्वती की कृपा बनी रहे और जीवन में बुद्धि, ज्ञान और सौभाग्य आए।बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के अलावा इन देवी की भी होती है पूजा
बसंत पंचमी माघ माह की गुप्त नवरात्रि के दौरान आती है। इस कारण बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती के साथ ही 10 महाविद्याओं में 5वीं महाविद्या मां छिन्नमस्ता का भी पूजन किया जाता है। माता का पूजन शत्रु नाश, राहु दोष और रोग मुक्ति के लिए बेहद कारगर साबित होता है। मां का पूजन शीघ्र फलदाई है, लेकिन मां की पूजा किसी गुरु की देखरेख में करें।बसंत पंचमी पर क्या शुभ कार्य किए जाते हैं?
सरस्वती पूजा, विद्यारंभ संस्कार, नए काम की शुरुआत, संगीत-साधना और शिक्षा से जुड़े कार्य शुभ माने जाते हैं।मां सरस्वती कौन हैं, किसकी पत्नी हैं
मां सरस्वती हिंदू धर्म में विद्या, बुद्धि, ज्ञान, संगीत, कला और वाणी की देवी मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती को ब्रह्मा जी की पत्नी माना जाता है। ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता माना जाता है और मां सरस्वती को ज्ञान व बुद्धि का स्रोत, जो सृष्टि को दिशा देती हैं।बसंत पंचमी को मां सरस्वती की पूजा क्यों की जाती है
मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे विद्या और ज्ञान का विशेष दिन माना जाता है।बसंत पंचमी क्या है?
बसंत पंचमी हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जो ऋतु परिवर्तन और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की पूजा के लिए मनाया जाता है।बसंत पंचमी पर क्या-क्या शुभ कार्य किए जाते हैं
सरस्वती पूजा, विद्यारंभ संस्कार, नए काम की शुरुआत, संगीत-साधना और शिक्षा से जुड़े कार्य शुभ माने जाते हैं।बसंत पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
इस दिन तामसिक भोजन, क्रोध, आलस्य और अपवित्र विचारों से दूर रहना चाहिए।बसंत पंचमी 2026 की तिथि कब से कब तक रहेगी
बसंत पंचमी 2026 की तिथि 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को 02:28 AM पर आरंभ होगी। इसका समापन 24 जनवरी 2026, शनिवार को 01:46 AM पर होगा।बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?
धार्मिक रूप से बसंत पंचमी का पर्व ज्ञान और विद्या को समर्पित है, जबकि सांस्कृतिक रूप से यह बसंत ऋतु के आगमन और नई शुरुआत का प्रतीक है।मां सरस्वती के हाथों में क्या होता है
मां सरस्वती का जो रूप बताया जाता है, उसमें उनके चार हाथ होते हैं। इन हस्तों में वह वीणा, पुस्तक, माला और कमंडल लिए होती हैं। ये ज्ञान, साधना, संगीत और आत्मशुद्धि के प्रतीक हैं।बसंत पंचमी का महत्व बताएं
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, कला, ज्ञान, शिक्षा और बुद्धि की देवी सरस्वती का जन्म इसी दिन हुआ था। इसी कारण देश के अनेक हिस्सों में इस दिन देवी सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है। बसंत पंचमी के साथ ही लोग होली की तैयारियां भी शुरू कर देते हैं, क्योंकि बसंत पंचमी के 40 दिन बाद होली का पर्व आता है।मां सरस्वती का बीज मंत्र बताएं
मां सरस्वती का बीज मंत्र - ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः॥ - है। इस मंत्र का जाप विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।बसंत पंचमी पर मंत्र पढ़ते समय क्या ध्यान रखें?
बसंत पंचमी पर पूजा के समय मन शांत रखें और साफ जगह पर बैठें। इस दौरान पीले कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। मंत्र का उच्चारण साफ और ध्यान से करें।
बसंत पंचमी पर कौन सी सरस्वती वंदना पढ़ें?
बसंत पंचमी पर सबसे प्रसिद्ध वंदना है –
“या कुन्देन्दु तुषार हार धवला…”
इसे पढ़ने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि मानी जाती है।
सरस्वती पूजा में सबसे आसान मंत्र कौन सा है
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” सबसे सरल मंत्र माना जाता है।
इसे बच्चे और बड़े सभी पढ़ सकते हैं।
इस मंत्र से पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है।
बसंत पंचमी पूजा में मंत्र जाप कितनी बार करें?
बसंत पंचमी पूजा में मंत्र जाप 108 बार करना शुभ माना जाता है। अगर समय कम हो तो 11 या 21 बार भी जप कर सकते हैं। मुख्य बात मन की श्रद्धा की है।सरस्वती पूजा में क्या-क्या चढ़ाएं?
बसंत पंचती के दिन सरस्वती पूजा में पीले फूल, फल और मिठाई चढ़ाई जाती है। खासकर केसरिया खीर या बूंदी के लड्डू शुभ माने जाते हैं। हल्दी और चंदन भी जरूर अर्पित करें।
बसंत पंचमी पर कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?
बसंत पंचमी पर प्रसाद के रूप में खीर, मालपुआ और बूंदी के लड्डू चढ़ाए जाते हैं। पीले रंग का प्रसाद ज्यादा शुभ माना जाता है। प्रसाद घर में खुशी और मिठास लाता है।Aaj Ka Panchang : प्रदोष व्रत आज, पंचांग से जानें 24 सितंबर के शुभ और अशुभ मुहूर्त और दिशा शूल
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