Ashadha Gupt Navratri 2023: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2023 कब से कब तक रहेगी, जानिए घटस्थापना मुहूर्त

  • Authored by: लवीना शर्मा
  • Updated Jun 19, 2023, 07:52 AM IST

Ashadha Gupt Navratri 2023 Puja Vidhi And Muhurat: गुप्त नवरात्र थोड़ी कठिन साधना का पर्व है। किसी विशेष उद्देश्य या सिद्धि को प्राप्त करने के लिए माता काली से लेकर कमला देवी तक कि आराधना का महान उत्सव एवं पुनीत अवसर है। जानिए गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि, घटस्थापना मुहूर्त और महत्व।

Ashadha Gupt Navratri 2023 Puja Vidhi, Muhurat: गुप्त नवरात्रि जैसा कि नाम से ही पता चलता है गोपनीय नवरात्रि। साल में चार नवरात्रि आती है जिनमें से दो नवरात्रि सार्वजनिक तौर पर मनाई जाती हैं वहीं दो नवरात्रि गुप्त रूप से मनाई जाती है। 19 जून से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही हैं। ये नवरात्रि 28 जून तक चलेंगी। गुप्त नवरात्रि की अष्टमी (Gupt Navratri Ashtami 2023) 26 जून को, गुप्त नवरात्रि नवमी (Gupt Navratri Navami 2023) 27 जून को पड़ेगी। वहीं नवरात्रि व्रत पारण 10 जून को किया जाएगा। जानिए क्या है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का महत्व और पूजा विधि।

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Ashadha Gupt Navratri 2023 Puja Vidhi And Muhurat: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2023 पूजा विधि और मुहूर्त

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2023 डेट और घटस्थापना मुहूर्त (Ashadha Gupta Navratri 2023 Date and Ghatasthapana Muhurta)

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2023 प्रारंभ और समापन तिथि19 जून से 28 जून 2023
आषाढ़ घटस्थापना 202319 जून 2023, सोमवार
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त 202305:23 AM से 07:27 AM
अवधि02 घण्टे 04 मिनट
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त11:55 AM से 12:50 PM
अवधि00 घण्टे 56 मिनट
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ18 जून 2023 को 10:06 AM बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त19 जून 2023 को 11:25 AM बजे
मिथुन लग्न प्रारम्भ19 जून 2023 05:23 AM बजे
मिथुन लग्न समाप्त19 जून 2023 07:27 AM बजे

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पूजा विधि (Ashadha Gupt Navratri Puja Vidhi)

  • गुप्त नवरात्रि वाले दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • पूजा की थाल सजाएं।
  • मां दुर्गा की प्रतिमा को लाल वस्त्र अर्पित करें।
  • अब एक मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं और नवमी तक इन पर थोड़ा पानी का छिड़काव करते रहें।
  • पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें।
  • कलश को गंगा जल से भरें। उसके मुख को आम की पत्तियों से सजाएं। अब एक नारियल को लाल कपड़े से लपेटें और कलावा से उसे बांधें। नारिलय को कलश के ऊपर रख दें।
  • फिर फूल, कपूर, अगरबत्ती आदि के साथ पंचोपचार पूजा करें।
  • फिर नौ दिनों तक मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।
  • अष्टमी या नवमी के दिन दुर्गा पूजा करके नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें पूड़ी, चना, हलवा का भोग लगाएं।

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