Sawan Shivratri 2022 Date, Puja Vidhi: सावन की शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ ऐसे करें पूजा, मिलेगा शुभ फल 

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 25, 2022, 04:04 PM IST

Sawan Shivratri 2022 Date, Time, Puja Vidhi In Hindi: हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। यहां जानें सावन महीने में शिवरात्रि का व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन पूजा कैसे करें।

Sawan Shivratri 2022 Date, Puja Vidhi: सावन की शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ ऐसे करें पूजा, मिलेगा शुभ फल 

Sawan Shivratri 2022 Date, Time, Puja Vidhi, Sawan Shivratri Kab Hai in Hindi: हर माह चतुर्दशी तिथि पर शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। सावन माह की शिवरात्रि तिथि बेहद विशेष मानी गई है। शिव जी को समर्पित शिवरात्रि पर व्रत रखना तथा शिव‌ जी की आराधना करना लाभदायक माना जाता है। सावन‌ 2022 में सावन‌ शिवरात्रि तिथि 26 जुलाई को है। मान्यता है कि सावन‌ शिवरात्रि पर व्रत रखने से तथा शिव जी की आराधना करने से भक्तों को विशेष फल की प्राप्ति होती है। जो भक्ता सावन शिवरात्रि पर सच्चे मन से शिव जी की पूजा करता है इसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन शिवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्तों पर शिव जी की विशेष कृपा बरसती है। यहां जानें वर्ष 2022 में सावन शिवरात्रि कब है और इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पूजा कैसे करना चाहिए। 

सावन शिवरात्रि की तिथि 

सावन शिवरात्रि की तिथि एवं पूजा मुहूर्त

सावन शिवरात्रि तिथि: 26 जुलाई 2022

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 26 जुलाई 2022 शाम 6:45

चतुर्दशी तिथि समापन: 27 जुलाई 2022 रात 9:10

सावन शिवरात्रि की पूजा विधि

सावन शिवरात्रि का व्रत सनातन धर्म में बेहद विशेष माना गया है। इस दिन शिव जी के सभी भक्तों को सुबह नित्य क्रियाओं से निवृत होने के बाद स्नान अवश्य करना चाहिए। स्नान करने के बाद पीले या सफेद वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती के सामने व्रत करने का संकल्प लें। व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान शिव और पूरे शिव परिवार की पूजा आराधना करें। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक करना बेहद लाभदायक माना गया है। पूजा के दौरान भगवान शिव को शहद, दूध, दही, चीनी आदि अर्पित करें। इस दिन भगवान शिव को धतूरा, माला, बेलपत्र आदि अर्पित किया जाता है। इसके बाद शिव चालीसा या शिव तांडव स्त्रोत आदि का पाठ करें और कथा पढ़ें। अंत में शिवजी की आरती जरूर करें।

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