Akhuratha Sankashti Chaturthi Vrat Katha: अखुरथ संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा, पढ़ें रावण और किष्किंधा नरेश बालि की कहानी

Akhuratha Sankashti Chaturthi Vrat Katha (अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा): पौष मास में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को अखुरथ संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। आज वही खास दिन है। नारद पुराण अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखने और पूजा-पाठ करने से गणपति बप्पा की कृपा बरसती है। यहां से आप अखुरथ संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ सकते हैं।

Akhuratha Sankashti Chaturthi Vrat Katha (अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा): अखुरथ संकष्टी चतुर्थी की पौराणिक कथा के अनुसार एक बार रावण ने स्वर्ग के सभी देवताओं को जीत लिया था और संध्या करते हुए उसने बालि को भी पीछे से जाकर पकड़ लिया था। उस समय वानरराज बालि रावण से कहीं गुना अधिक शक्तिशाली थे उन्होंने रावण को अपनी बगल में दबा लिया और उसे किष्किंधा ले आए और अपने पुत्र अंगद को खिलोने की तरह खेलने के लिए दे दिया। अंगद ने रावण को खिलौना समझा और उसे रस्सी से बांधकर इधर-उधर घुमाने लगे। जिसकी वजह से रावण को काफी कष्ट हो रहा था।

अखुरथ संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (pic credit: canva)

दुखी होकर रावण ने अपने पिता ऋषि पुलस्त्य जी को याद किया। रावण की ये दशा देखकर उनके पुत्र को बहुत दुख हुआ और उन्होंने पता लगाया कि आखिर रावण की ये दशा कैसे हुई। उन्होंने मन में सोचा कि घमंड होने पर देव, मनुष्य और असुर सभी की यही गति होती है। लेकिन फिर भी पुत्र मोह में आकर उन्होंने रावण से पूछा कि तुमने मुझे कैसे याद किया? रावण ने कहा हे पितामह, मैं बहुत दुखी हूं, यहां सभी मुझे धिक्कारते हैं, आप मेरी रक्षा कीजिए और इस पीड़ा से मुझे मुक्ति दिलाइए।

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